कल शुक्रवार को हुयी जैन भगवती दीक्षा के बाद बहन अंजलि वोहरा बन गयी अनादि प्रियाश्रीजी महाराज, भले यह पूरी रस्म कुछ घंटो में निपटा ली गयी हो लेकिन इतना तय है की इसकी तैयारी मन के तल पर बीते कई सालो से बहन अंजलि कर रही होगी, क्योकि यह कोई मामूली काम नहीं सांसारिकता का परित्याग, कहना आसान है लेकिन एक दिन इस संकल्प के साथ जीना एक बड़ा चौलेंज है आम इंसान के लिए किसी पिता को उसका पुत्र न दिखे या फिर किसी पुत्र को उसका पिता न दिखे तो खलबली मचने लग जाती है ऐसे में यहाँ तो सारे रिश्ते नाते उम्र भर के लिए त्यागने का संकल्प है जो निश्चित तौर पर एक करिश्मा ही है
कल मैने एक वीडियो देखा जो जम्बू साहब ( जंबूकुमार जी जैन, सरावगी) ने मुझे भेजा था यह वीडियो उनके निवास का था जहाँ बहन अंजलि ने अपना वेश बदला उस वीडियो में उनके सर के बाल उतारे जा रहे थे इस वीडियो को देखकर मै अचंबित और विस्मित था, सोचने लगा महिला तो छोड़िये यदि किसी पुरुष के सर पर बाल कम पड़ जाए तो उसकी नींद उड़ जाती है और वो दही, निम्बू का लेप लगाना शुरू कर देता है, कई तो सर के पीछे बचे बाल आगे कर के घूमते है वही महिलाओ के लिए तो ये केश अनमोल ही है लेकिन मैने वीडियो मे देखा की बहन अंजलि केश लोचन के समय मुस्कुरा रही थी मैने देखा उनके बाल खासे लम्बे और काले थे, जिसे एक बार मे हटा दिया गया और वे रत्तीभर भी विचलित नहीं हुयी, शायद साध्वी बनने की अग्नि परीक्षा इन्ही सब रास्तो से होकर गुज़रती होगी
केश लोचन के इस वीडियो को मैने कई बार देखा मुझे यह भी पता चला की पहली बार जब केश लोचन होता है यानि सर के बाल जो उतारे जाते है तो कुछ बाल प्रतीकात्मक रूप से हाथो से खींचकर हटाते है बाकी हेयर रिमूवर मशीन से निकाल दिए जाते है, लेकिन साध्वी होने के बाद इन बालो को केवल हाथ से खींच कर ही हटाया जाता है फिर किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता ये भी कोई मामूली बात नहीं
मैने कल शुक्रवार को जो लेख लिखा था ष्अब बहन नहीं रहीष् उस पर सैंकड़ो कॉमेंट सोश्यल मीडिया पर मुझे मिले जिसमे कुछ लोगो ने अपनी रिएक्शन मे लिखा ष्ये साध्वियाँ सचमुच मे धरती पर भगवान् हैष् बहन अंजलि जब दीक्षा के समय अपने गहने उतारकर फेंक रही थी उस क्लिप को मैने अपनी फेसबुक वाल पर पोस्ट किया था, जिसे यह लेख लिखे जाने तक करीब सवा तीन लाख लोग देख चुके थे
आप सोचिये जब हमारे परिवार का कोई सदस्य पढ़ाई के लिए बाहर जा रहा होता है तो पहली बार उसको विदा करते समय परिजनों की आँखे नम हो जाती है जबकि उसका बिछोह कुछ समय का है वही वो हर पल फोन और अन्य साधनो से आपकी आँखों के सामने होता है लेकिन दीक्षा के बाद तो जीवन भर के लिए साथ छूट जाता है दीक्षा का वो लम्हा ऐसा होता है जब समूचे परिवार और खानदान का दिल हिल जाता है और पूरा परिवार अपनी रुलाई नहीं रोक पाता, वही दूसरी तरफ जो दीक्षा ले रहा होता है वो बिल्कुल शांत होता है, खुश होता है की वह तप की राह पर जा रहा है मैने बहन अंजलि की दीक्षा की जीतनी भी तस्वीरें और वीडियोज़ देखे उसमे उनको मुस्कुराते देखा, एक पल के लिए भी नहीं लगा की नाते, रिश्तेदारों से बिछुड़ने का कोई मलाल उनके चेहरे पर है, ये चमत्कार ही तो है की आपका मन पूरी तरह बदल गया, और आपने सच को जान लिया की संसार मे जो कुछ है सब मोह माया है और इसी का त्याग ही तो रूहानियत की पहली सीढी है और बहन अंजलि इस सीढ़ी पर सफलतापूर्वक चढ़कर अनादि प्रियाश्रीजी महाराज हो गयी, मै दिल की गहराई से आपकी अनुमोदना करता हूँ, जय जिनेन्द्र !