नीमच। युवा वर्ग के समाज को व्यसन नशा मुक्त बनाने का संकल्प ले। नशा सामाजिक बुराई है। इसका त्याग करना चाहिए। नशा विनाश का मार्ग है। इससे बचना चाहिए। नशा विकास में सबसे बड़ी बाधा है।यह बात भागवतचार्य पंडित भीमाशंकर शास्त्री ने कही । वे श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव आयोजन समिति के तत्वावधान दिवंगत पूर्व जनपद उपाध्यक्ष राजाराम पाटीदार की चतुर्थ पुण्य स्मृति में गामी परिवार भेरु बावजी देवरा परिसर रामनगर में श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा से प्रेरणा लेकर पाप कर्मों का त्याग करना चाहिए। सदैव सहयोग करने वाले का धन्यवाद देना चाहिए। नहीं तो ऋण बढ़ जाता है।समय आने पर सभी साथ छोड़ देते हैं तब परमात्मा को याद करना चाहिए ।वह संकट में साथ देता है। द्रोपदी का चीर हरण के समय द्रौपदी द्वारा भगवान कृष्ण को याद करने पर साड़ी चीर बढाकर लाज बचाई।संसार को देखेंगे तो संदिग्ध, सांवरिया भगवान को देखेंगे तो भक्त कहलाएंगे।बुरी नजर से किसी को नहीं देखना चाहिए वरना भगवान की नजर से नहीं बच पाएंगे।बुरे कर्मों का फल सजा के रूप में अवश्य मिलता है।पाप करम करने वाले को नर्क में स्थान मिलता है। अपना अच्छा हम संसार को दिखाते हैं अपनी बुराई हम संसार को नहीं दिखाते हैं।प्राचीन काल में लोग दान छुपा कर देते थे छपा कर देते हैं। भलाई कर दरिया में डाल देना चाहिए। अच्छा कर्म करना चाहिए। बुरे कर्म से सदैव बचना चाहिए।भीष्म पितामह ने पिछले जन्म में तितली को कांटे लगाए थे ।
उनको बाणों की शय्या पर सोना पड़ा था।पाप का प्रायश्चित करना चाहिए।पाप कम हो जाता है।अर्जुन ने महाभारत युद्ध में कृष्ण को अपना सारथी बनाया और कहा कि श्री कृष्ण जिधर तुम चलोगे उधर में चलूंगा महाभारत में जय श्री को प्राप्त किया। इसी प्रकार हम परमात्मा को आगे रखे और संसार में आगे बढ़ते रहे तो हमारे सभी काम सफल हो सकते है। करण द्वारा महाभारत युद्ध में अभिमन्यु तीर लगने से घायल था तब करण से मरते समय अभिमन्यु ने पानी मांगा पानी होने के बाद करण ने पानी नहीं पिलाया था। इसलिए करण को मृत्यु की सजा मिली थीं। अर्थी और डोली दोनों चलती है एक पिया के घर जाती है एक परमात्मा के घर जाती है।सुख के समय सब आगे खड़े होते हैं दुख के समय सब लोग पीछे खड़े हो जाते हैं।जीवन में अंतिम समय परमात्मा को याद करें तो मृत्यु के उपरांत सद्गति होती है।मृत्यु पूर्व भक्ति तपस्या का अभ्यास करें तभी सद्गति होती है। अमेरिका में 35प्रतिशत लोग होटलों से भोजन मंगाते हैं। इसलिए घर परिवार बिखर रहे हैं चिंतन का विषय है।पुण्य कर्म नहीं कर पाए कोई बात नहीं लेकिन बुरे कर्म से सदैव बचना चाहिए। पहनावे परिधान का प्रभाव संस्कृति पर होता है। भारतीय संस्कृति के अनुरूप परिधान पहनना चाहिए।युवा वर्ग पैसे देकर फटी जींस पैंट खरीदकर पहन रहे हैं चिंतन का विषय संस्कृति किधर जा रही है। चिकित्सा वैज्ञानिकों ने भी मान लिया गर्भ में रहने वाला 7 माह का बच्चा अपने स्वभाव का निर्माण कर लेता है। घरों में महापुरुषों के चित्र लगाना चाहिए। लक्ष्मी सरस्वती का स्वरूप मातृशक्ति के अर्धनग्न अश्लील फोटो घरो में नहीं लगाएं। मदिरापान करने वाले का पुण्य चला जाता है। गुंथा हुआ आटा रात्रि को घर में नहीं रखना चाहिए। प्रेतयोनी प्रभाव डालती।भागवत कथा श्रवण से मुक्ति होती है।शंकर जैसे शक्तिशाली हो तो भी गुरु बिना कल्याण नहीं होता है। सदगुरु बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है।गुरु की शरण में जाने से आध्यात्मिक उन्नति होती है धन संपत्ति कि नहीं। हरी और गुरु की निंदा नहीं सुनना चाहिए। गौ हत्या का दोष लगता है।दीक्षा गुरु के बिना जीवन का कल्याण नहीं होता है।गुरु की निंदा करने वाले को भगवान भी नहीं बचा सकते हैं। जीतें जी गंगा नदी स्नान कर पवित्र होना चाहिए। मरने के बाद हरिद्वार गंगा जी में तो जाना ही है। राम नाम का धन ही मरने के बाद साथ जाता है धन-संपत्ति साथ नहीं जाती है। दधिचि ऋषि ने राष्ट्र हित के लिए अपनी अस्थियों का दान कर दिया। किसी के संकट के समय काम आए तो वेद पढ़ने से कम नहीं होता। धर्म भूल जाए तो धर्मपत्नी याद दिलाती। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में मौलिकता होगी तभी सार्थकता होती है।भारत देश को विश्व गुरु बनाने के लिए व्यसन मुक्त समाज का संकल्प लिया।बुरी संगत हमारा नुकसान करती है इसलिए सदैव अच्छी संगत करना चाहिए। राजा हरिश्चंद्रघ् ने सत्य के लिए अपने को बेच दिया था।
कथा तो बहाना है ।संस्कारों की फसल उगाना है। भक्तों की भक्ति भगवान से बड़ी होती है।सपोर्ट और वोट नहीं समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयों की खोट मुझे देना,
महाराज श्री ने राम जन्म, हिरण्यकश्यप, प्रहलाद, कामेष्टी यज्ञ, रेवती,दुर्वाषा ऋषि, कश्यप ,भक्त प्रहलाद, अष्टम स्थान , मगर गजेंद्र ,मोक्ष, कथा समुद्र मंथन ,एरावत ,राहु, केतु, परिजात, अप्सराएं, लक्ष्मीजी, वारुणी, मदिरा, आदि धार्मिक प्रसंग का वर्तमान परिपेक्ष में महत्व पारित किया।
भागवत पौथी पुजन महाआरती में जावद जनपद के पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण पाटीदार, वरिष्ठ भाजपा नेता पूरणमल अहीर, समाजसेवी मनोहर जाट मोरवन, गोपाल पाटीदार मुकनपुरा आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम शुभारंभ पर विद्वान पंडितों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ निरंतर किया जा रहा है। आना हो गणराज हरि भागवत सत्संग में भजन संकीर्तन से हुआ।कथा भक्ति पांडाल में ठण्डी हवा के 108 फव्वारे तथा ठण्डी हवा के कुलर भी लगाए ।
महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ 8मई सोमवार भेरुजी के देवरे पर पूजा अर्चना आरती के साथ हुआ। निर्मला देवी धर्मपत्नी स्वर्गीय राजाराम पाटीदार, जोगेश पाटीदार ने बताया कि 10 मई को श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का विश्राम हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर कृष्णाष्टकम स्तुति का सामुहिक वाचन किया गया। विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण किया। श्रीमद् भागवत हवन यज्ञ में श्रीमती सुशीला प्रेमसुखपाटीदार, सम्पत बाई जानकीलाल पाटीदार ने वेदिक मंत्रो उच्चारण किया। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन देवीलाल मुच्छरा, अरविंद पाटीदार ने किया।
श्री कृष्ण जन्म पर पुष्प वर्षा से कि अगवानी-
श्रीमद्भागवत के मध्य भागवत आचार्य पंडित श्री शास्त्री ने जब श्री कृष्ण जन्म का प्रसंग बताया तो भक्ति पांडाल में श्रद्धालु भक्तों द्वारा नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की पालकी जय कन्हैया लाल ,जय जय श्री कृष्णा की स्वर लहरीयां बिखरने लगी। गुब्बारों , केले के पत्तों से सजाया गया।इस अवसर पर आतिशबाजी कर प्रसंता का इजहार किया गया। माखन मिश्री पंजेरी का प्रसाद वितरण किया गया। 17 माह के नन्हे बालक वैदिक पुत्र यशोदा ईश्वर पाटीदार,15माह क्रियांश पुत्र दिव्या गौरव पाटीदार को टोकरे फुलों से श्रृंगारित किया गया।जिसे वासुदेव बने जोगेश पाटीदार ने सिरोधार्य किया। झांकी सज्जा का निर्देशन राधेश्याम नागदा पिपलिया रावजी ने किया।
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वॉइस ऑफ़ एमपी की मुहीम- बेज़ुबान पक्षियों के लिए दान करें सकोरे या फिर अपने मकान की छत पर रखे सकोरे, भीषण गर्मी में सुने इनकी फ़रियाद।