भोपाल । भोपाल की दूसरी सबसे बड़ी शासकीय ईमारत सतपुड़ा भवन में आग लगने से एमपी की सियासत भी गर्म हो गई है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस, भाजपा पर हमलावर हो गई है। आग लगने को लेकर कांग्रेस ने इसे सोची समझी साजिश बताया है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए ये कारनामा किया गया है।
वहीं आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्वीट कर कहा कि हनुमान जी की महिमा अपरंपार है। कर्नाटक से सीधा भोपाल पहुंच गए और लंका दहन शुरू। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, आग लगी या लगाई गई। अभी तक बोला है कि 12 हजार फाइलें जली हैं। पता नहीं कितने हजारों फाइल जली हैं? क्या लक्ष्य था, क्या उद्देश्य था? यह भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा मामला है। इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए।नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि शिवराज सिंह की सरकार ने अपनी लंका खुद जला ली, ताकि उनके काले कारनामे उजागर नहीं हो सकें।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस में शामिल हुए दीपक जोशी ने ट्वीट कर लिखा कि यह मध्यप्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार की लपटें हैं। विभागों के भ्रष्टाचार की फाइलें जलाकर खाक कर दी गईं। यह आग किन परिस्थितियों में लगी? आखिर इतने महत्वपूर्ण भवन में क्यों आग पर काबू पाने पर्याप्त साधन नहीं थे? इस अग्निकांड की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
बसपा से राज्यसभा सांसद और मप्र के प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम ने ट्वीट कर कहा कि सतपुड़ा जलता रहा, सत्ता मुस्कुराती रही। क्योंकि, नर्सिंग कॉलेज स्कैम, कोविड खर्च, लोकायुक्त शिकायत, आदिवासी कल्याण खर्च के साथ तमाम गोपनीय फाइल्स जलकर राख हो गईं। सतपुड़ा में आग चुनाव से पहले ही लगती है- 14 दिसंबर 2018, 25 जून 2012 को भी इसी भवन में आग लगी थी।
वहीं नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह और विधायक पीसी शर्मा सहित कांग्रेस के नेता सतपुड़ा भवन निरीक्षण करने के लिए पहुंचे। लेकिन पुलिसकर्मियों ने इन सभी नेताओं को भवन के बाहर ही रोक लिया।
मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित की है। कमेटी तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। कांग्रेस के आरोप पर भाजपा ने कांग्रेस को गिद्ध बताया। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वहां 4000 हजार कर्मचारी थे। कैसे कोई केरोसिन-पेट्रोल ले जाता। कांग्रेस अवसर तलाशती है।