डेस्क। नीमच जिले की विधानसभा क्रमांक 230 जावद, जहां गुटबाजी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों को एकजुटता की शपथ दिलाई थी। वहां धरातल पर देखा जाए तो कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। सत्यनारायण पाटीदार और राजकुमार अहीर के समर्थक एक दूसरे को फूटी आंख नहीं देख रहे हैं। ऐसे में दिग्गी के द्वारा सार्वजनिक मंच पर दिलाई गई कसमें सिर्फ औपचारिकता बन कर रह गई है।
सभी को ज्ञात है कि जावद सीट से कांग्रेस से प्रबल उम्मीदवारों में दो ही नाम उभर कर आते हैं। एक पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राजकुमार अहीर और दूसरा जनपद पंचायत जावद के पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण पाटीदार का। दोनों ही नेता जावद से कांग्रेस से टिकिट लेने के लिए कमरतोड़ मेहनत कर रहे हैं। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि कांग्रेस से जावद के लिए संभावित उम्मीदवार भी इन दोनों नेताओं में से होगा। अब देखना है कि कांग्रेस सर्वे के आधार पर टिकिट वितरण करती है या और कोई खेल चलेगा।
अब बात करें जावद विधानसभा में गुटबाजी की तो कांग्रेस में यह शीर्ष पर है। यह बात जगजाहिर है कि सत्तू पाटीदार और अहीर दोनों की ही आपस में नहीं बनती है। दोनों नेता अक्सर एक मंच पर नहीं देखे जाते हैं। साथ ही एक दूसरे का खुला विरोध भी करते हैं। इनके साथ इन दोनों नेताओं के कार्यकर्ता तो इनसे दो कदम आगे चलते हुए नजर आ रहे हैं। समर्थक अपने नेता को विधायक तक मान चुके हैं। वहीं सत्तू और अहीर समर्थकों के बीच आजकल सोशल वार भी देखा जा रहा है। जिसमें समर्थक एक दूसरे के नेता पर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं और दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
कांग्रेस में गुटबाजी का यहीं आलम रहा तो हमेशा की तरह जावद में इसका इस बार भी सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। कांग्रेस में हमेशा से ही संगठन में नेतृत्व की कमी देखी गई है। कांग्रेस में नेता, संगठन से कई गुना बड़ा होता है। वहीं पार्टी के कार्यकर्ता भी सार्वजनिक रूप से अपनी भड़ास निकाल देते है। जिससे पार्टी की छवि को नुकसान तो पहुँचता ही है। साथ ही संगठन का औचित्य भी खतरे में आ जाता है।
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