धार। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देशन में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में रोगों की रोकथाम हेतु होम्योपैथिक औषधि का वितरण मलेरिया प्रभावित गांवों में किया जा रहा है। मलेरिया रोकथाम में मलेरिया ऑफ 200 कारगर सिद्ध हुई जिसके उत्साह जनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। जिला आयुष अधिकारी डॉ रमेश चंद्र मुवेल ने बताया कि इस बर्ष भी धार जिले में मलेरिया उच्च जोखिम वाले गांव सोनगढ़, मोगजपाढा, जेतगढ़, उमेदपुरा, बिजलपुर, नानखोदरा, भैसवाडा, अम्बापुरा, बलदीपुरा, खिड़कीयाखुर्द, कालापाठा, रानीपुरा, मुरड़का में होम्योपैथिक औषधि मलेरिया ऑफ 200 का वितरण आयुष विभाग, स्वास्थ विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के द्वारा किया जायेगा। जिसमें प्रथम चरण 14 जुलाई, 21 जुलाई एवं 28 जुलाई को तथा द्वितीय चरण 11 अगस्त, 18 अगस्त एवं 25 अगस्त को आयुष मलेरिया नियंत्रण अभियान आयोजित होगा। बताया गया कि होम्योपैथिक औषधि मलेरिया ऑफ 200 किट निर्माण कार्य भी जिला स्तर पर होम्योपैथिक औषधालय मगजपुरा धार में डॉ नरेंद्र नागर होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी, डॉ गायत्री मुवेल होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी के मार्गदर्शन में धर्मेन्द्र पिपलोदिया, गंगाराम चौहान के द्वारा किया जा रहा है। मलेरिया ऑफ 200 की कुल 6 खुराक का वितरण आशा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से होम्योपैथिक औषधि मलेरिया ऑफ 200 का वितरण घर-घर जाकर किया जायेगा। बताया गया कि मलेरिया तेज बुखार वाली बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनॉफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है।खून में उपस्थित परजीवी को अपने शरीर में खींच लेती है। जब यह संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटती है, तो अपने शरीर में पल रहेमलेरिया परजीवी को उसके शरीर में छोड़ देती है। मलेरिया परजीवी खून के लाल रक्त कणों में वृद्धि करता है और मनुष्य बुखार से ग्रसित हो जाता है। व्यक्ति कमजोर और अल्प रक्तता का शिकार हो जाता है। एनॉफिलीज मच्छर कई प्रकार के साफ जल जमाव में पनपता है, जैसे कि धान का खेत, तालाब, गढ्ढे, खाई, कृत्रिम जलाशय, छत पर बनी हुई टंकी, जल एकत्रित करने के लिए जमीन के अंदर बनी टंकी, प्रयोग में न आने वाले कुएँ, जलधारा के किनारे से एकत्रित जल, नदियाँ, हेण्डपंप, नल के आसपास जमा पानी, पशुओं के पानी पीने के हौद, नहरों में रुकें हुये पानी में इत्यादि। प्रत्येक उम्र/वर्ग के लोग मलेरिया से पीड़ित हो सकते है। हालाकि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिला को मलेरिया से ज्यादा खतरा होता है। मलेरिया के लक्षण तेज ठण्ड देकर बुखार, ज्वर के साथ, कंपकपी, सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी होना मलेरिया के प्रमुख लक्षण है। बुखार 102 से 104 फेरन्हाईट होता है तथा करीब दो घंटे बाद पसीना आकर बुखार उतर जाता है गम्भीर अवस्था में यह खून की कमी का कारण बनता है। यदि जल्द एवं पर्याप्त उपचार नहीं किया गया तो मलेरिया से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। गर्भावस्था में मलेरिया गंभीर होता है, और जच्चा-बच्चा की जान को खतरा भी हो सकता है। जिला आयुष अधिकारी डॉ रमेश चंद्र मुवेल ने समस्त जनता से अपील है कि वे रोग मुक्त एवं स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुष विभाग के इस अभियान का हिस्सा बनिए और सक्रिय भागीदारी लेकर अपने परिवार को सुरक्षित एवं सुखी कीजिए।