चित्तौड़गढ़। एक सफल बोली में, निरमा ग्रुप ने ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड से लगभग 7,500 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज लिमिटेड की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक निश्चित समझौता किया है। ये करार समापन समारोह के तहत निरमा सेबी विनियमों के अनुसार एक अनिवार्य ओपन ऑफर करेगी। यह अधिग्रहण कस्टमरी रेगुलेट्री अनुमतियों के तहत है। इस अधिग्रहण के साथ, निरमा ग्रुप एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट प्लेटफॉर्म में प्रवेश कर रहा है और इंजेक्शन, पैरेंटल और आई केयर उत्पादों सहित फार्मास्यूटिकल्स पोर्टफोलियो में अपनी मौजूदा उपस्थिति का विस्तार कर रहा है। यह ट्रांजेक्शन मार्च माह में समूह द्वारा स्टेरिकॉन फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के अधिग्रहण के बाद इस साल दूसरा अधिग्रहण है। ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज लिमिटेड मुख्य रूप से एपीआई के डेवलपमेंट, निर्माण और मार्केटिंग के बिजनेस में कार्यरत है। कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो में विभिन्न थेराप्यूटिक सेग्मेंट्स शामिल हैं, जिनमें कार्डियोवैस्कुलर रोग, सेंट्रल नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर्स, मधुमेह, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ, ऑन्कोलॉजी, दर्द प्रबंधन और एंटी-इंफैक्टिव्स शामिल हैं। कंपनी की विनिर्माण सुविधाएं भारत में अंकलेश्वर, दहेज, मोहोल और कुरकुंभ में स्थित हैं और रिसर्च एंड डेवलपमेंट सुविधाएं महापे, अंकलेश्वर और दहेज में स्थित हैं। कंपनी चिंचोली, सोलापुर में एक एपीआई मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करने की प्रक्रिया में भी है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर हिरेन पटेल, प्रबंध निदेशक, निरमा लिमिटेड ने कहा कि “निरमा 2006 से फार्मास्युटिकल क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत है। हम इस सौदे को लेकर उत्साहित हैं और हमारा पूर्ण विश्वास के साथ मानना है कि यह हमारे फार्मास्युटिकल बिजनेस की ग्रोथ को अगले चरण में आगे बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा। हमारा मिशन हमेशा किफायती कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद उपलब्ध कराने पर केन्द्रित रहा है। हमारा हालिया निवेश फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के प्रति हमारे अटूट समर्पण का प्रमाण है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि “ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज का अधिग्रहण हमारी कंपनी के रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप है और निरमा को भारत में टॉप पांच इंडीपेंडेट एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडेंट कंपनियों में से एक के रूप में स्थापित करता है। यह रणनीतिक कदम हमें स्वदेशी रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर पूंजी लगाने में सक्षम बनाता है, जिससे भारत सरकार द्वारा शुरू की गई “मेक इन इंडिया” पहल में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।