विदिशा। कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने जिले में बाल विवाह रोकने हेतु जिला, विकास, ग्राम स्तर पर समितियों के गठन करने का आदेश जारी कर दिया गया है। कलेक्टर भार्गव ने समितियों के सभी सदस्यों से कहा है कि अध्यक्ष के मार्गदर्शन में आवश्यक कार्यवाही व उद्धेश्यो की प्राप्ति सुनिश्चित करें। यदि समितियो के क्षेत्राधिकार में बाल विकास का प्रकरण पाया जाता है तो बाल विवाह करने वाले, प्रोत्साहित करने वाले जैसे बाल विवाह में सम्मिलित बाराती, विवाह स्थल, गार्डन मालिक, खाना पकाने वाले रसोईयां, केटर्स, मौलवी, पंडित तथा पत्रिका छापने वाले प्रिन्टिग प्रेस के मालिक विरूद्व भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा (10) के तहत वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
कलेक्टर भार्गव ने सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को भी निर्देश प्रसारित किए है कि उनके कार्य क्षेत्रों में सामूहिक विवाह आयोजन की अनुमति इसी शर्त पर जारी करेंगे कि उक्त आयोजन में वर की आयु 21 वर्ष एवं वधु की आयु 18 वर्ष से कम ना हो। वर और वधु की सूची मय छाया चित्र एवं आयु प्रमाण उपरांत सामूहिक विवाह की अनुमति प्रदान की जाए।
कलेक्टर भार्गव के द्वारा बाल विवाह रोकने के लिए गठित त्रि-स्तरीय समिति के संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिला स्तरीय समिति अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित की गई है। समिति में सात सदस्य शामिल किए गए है उनमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सीएमएचओ, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, जिला संयोजक, जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीसी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी शामिल है।
विकासखण्ड स्तरीय समिति संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में गठित की गई है। उक्त समिति में अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, खण्ड चिकित्सा अधिकारी, जनपद सीईओ, खण्ड शिक्षा अधिकारी, विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को सदस्य नियुक्त किया गया हैं इसी प्रकार ग्राम, वार्ड, पंचायत स्तरीय समिति भी गठित की गई है जिसमें सरपंच, पार्षद अध्यक्ष होंगे जबकि पंचायत सचिव, वार्ड प्रभारी, नगरपालिका, आशा कार्यकर्ता, एएनएम, शिक्षक, आंगनबाडी कार्यकर्ता तथा स्व-सहायता समूह के सदस्यगण समिति के सदस्य होंगे।