जबलपुर। कमिश्नर अभय वर्मा ने कहा है कि तरंगें, प्रकाश और ध्वनि की अवधारणा है, जिसके माध्यम से विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक और मानव रहित घटनाओं का पता लगाया जाता है। वे आज पंडित लज्जा शंकर मॉडल स्कूल जबलपुर में संचालित ज्ञानाश्रय निःशुल्क कोचिंग क्लासेस के छात्र छात्राओं को तरंगदैर्ध्य, तीव्रता, ध्वनि, परावर्तन, अपवर्तन वर्णक्रम, उत्तल और अवतल लैंस आदि के बारे में समझा रहे थे। इस दौरान सहायक संचालक ज्ञान आश्रय निःशुल्क कोचिंग क्लासेस संतोष सेंगर एवं शिक्षक अंकित योगी और छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
आयुक्त वर्मा ने कहा कि अनुदैर्घ्य तरंगें वे तरंगें हैं जिनमें माध्यम के कणों का विस्थापन तरंग की गति की दिशा या उसके विपरीत दिशा में ही होता है। ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक तरंगों के रूप में गमन करती हैं । उन्होंने कहा कि ध्वनि तरंगे, अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगे होती हैं। ध्वनि एक प्रकार का कम्पन या विक्षोभ है जो किसी ठोस, द्रव या गैस से होकर संचारित होती है। उन्होंने कहा कि भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए मर्कल्ली स्केल का उपयोग किया जाता है, जबकि भूकम्प का परिमाण मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है। रिक्टर स्केल की माप 0-10 से निरूपित की जाती है। सबसे तेज भूकंप 10 तीव्रता का होता है।
उन्होंने कहा जब प्रकाश की किरण किसी चमकीली सतह से टकराकर उसी माध्यम में बापस लौट जाती है। उसे प्रकाश का परावर्तन कहते है, जबकि अपवर्तन में प्रकाश की किरण अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। उन्होंने कहा लाल, नीला और हरा यह प्राथमिक रंग होते है। इनके मिश्रण से ही अन्य रंग बनते है। लाल रंग का तरंगधैर्य सबसे अधिक और बैंगनी रंग का सबसे कम होता है। उन्होंने कहा दूर दृष्टिदोष वाले व्यक्ति के चश्मे में उत्तल और निकट दृष्टिदोष वाले व्यक्ति के चस्मे में अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है एवं दाढ़ी बनाने के लिए अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है।
उल्लेखनीय हैं कि कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन की पहल और आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा के डायरेक्टर परीक्षित भारती के सहयोग से जबलपुर में 01 मार्च से यूपीएससी एवं एमपीपीएससी की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग क्लासेज नियमित संचालित की जा रही है।