नीमच। वरिष्ठ अभिभाषक महेश पाटीदार ने बताया कि नीमच जिले विशेष कर नीमच में इन दोनों रोड पर दिन प्रतिदिन दुर्घटनाओं मे बच्चे, नौजवान, महिलाओं की आकस्मिक मृत्यु हो रही है। हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता साथी सुनील जैन के 18 वर्षीय होनहार पुत्र और उसके पहले वरिष्ठ समाजसेवी गोवर्धनलाल बाफना के युवा पुत्र की मृत्यु से शहरवासी दुखी और चिंतित है। लेकिन इन दोनों घटनाओं के साथ अन्य जो भी घटनाएं रोड पर हुई है उसमे ईश्वर और भाग्य की नियति के अलावा हमारे द्वारा बनाया गया सिस्टम और प्रशासन के द्वारा की गई व्यवस्था भी इसमें शामिल है।
दुखद दुर्घटनाओं को हम केवल ईश्वर और भाग्य के भरोसे छोड़कर अपने कर्तव्य की इति श्री नहीं कर सकते हैं। हमें चाहिए कि हम शहर में इस प्रकार का माहौल और व्यवस्था बनाएं की किसी नवयुवक और महिलाओं को सड़क पर अपनी जान न गंवाना पड़े।
1- नीमच एक बेहतर शहर है जहां चौड़े-चौड़े रोड हैं। लेकिन रोड के दोनों और लगभग 10-10 फीट तक गाड़ी पार्किंग से रोड संकरे हो गए हैं। इस कारण दुर्घटना बढ़ रही है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस संबंध में कठोर और प्रभावी प्रयास करें।
2- हेलमेट लगाना जरूरी है, शहर में युवाओं और जनता में ऐसा माहौल बनाएं की हेलमेट सुरक्षा और जीवन के लिए जरूरी है।
3- अंधाधुन और तेज गाड़ी चलाने वाले को हतोत्साहित करें।
4- चौराहे-चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था हो।
5- शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर थोड़ा प्रतिबंध हो।
6- ट्रैक्टर ट्राली जैसे वाहनों पर रेडियम हो।
7- सड़कों पर बैठे रहने मवेशियों के सींग पर रेडियम लगाया जाए।
8- छात्रों युवाओं को ट्रैफिक की चुनौतियों से परिचित कराकर नियमों का पालन करने के लिए समझाइए दे।
9- जनप्रतिनिधि केवल रोड और नाली तक ही अपने आप को सीमित नहीं रखें बल्कि रोडो को अतिक्रमण मुक्त कराकर उन्हें चौड़ा करवाकर ट्रैफिक व्यवस्था सही करवाए।
10- यातायात पुलिस को चाहिए कि वह रोड पर सेफ्टी ऑडिट करवाकर डिवाइडर के बीच में रेलिंग के जो कट हैं, उन्हें बंद करवाए।
यह तथ्य सर्व विदित है कि भारत देश में अन्य विकसित देशों के मुकाबले कम वाहन है लेकिन उन देशों के मुकाबले हमारे देश में सबसे ज्यादा सड़क की दुर्घटनाएं हो रही है। आप और हम सब जागरूक होंगे तो इन दुर्घटनाओं को हम कम कर सकेंगे।