गरोठ। मध्य प्रदेश सरकार पेसा एक्ट लाने के बाद में अधिसूचित क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की सहमति के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए गांव की जमीन का भू-अर्जन नहीं किया जाएगा। अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुशंसा के बिना खनिज के सर्वे, पट्टा देने या नीलामी की कार्यवाही नहीं की जा सकेगी। लेकिन इस भाजपा शासन काल में ग्रामीणों की लगातार विरोध एवं आपत्तियों के बाद मे मध्य प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर को नष्ट करके यहां की अनमोल मिट्टी राजस्थान की फैक्ट्री में पहुंचाई जा रही हैं।
जिम्मेदारो ने नियमों को ताक पर रखकर उक्त लेटराइट मिट्टी के खोदने की परमिशन दी गई। जिसके विरोध में ग्रामीणों ने शामगढ़ तहसील परिसर में एकत्रित होकर मंदसौर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि शामगढ़ तहसील के गांव पिछला से लगे हुवें पहाड़ी क्षेत्र से बेशकीमती लेटराइट मिट्टी (लाल मुहरर्म) खोदकर राजस्थान परिवहन की जा रही है। यह पहाड़ी प्राकृतिक स्थान है, एवं यहां पर कई देवी देवताओं के स्थान भी हैं। इसके अलावा इस पहाड़ी के 500 मीटर के दायरे में गांव पिछला में करीबन डेढ़ सौ परिवार गांव खेड़ी में करीबन 50 परिवार एवं गांव रुडी का खेड़ा की बसावट है। तीनों गांव के बीच में यह पहाड़ी है। इस पर हो रहे खनन से लगातार प्रदूषण फैल रहा है। ब्लास्टिंग की वजह से घरों को नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही पास में सड़क तालाब पहाड़ पर पेड़-पौधे भी है। इसके अलावा क्षेत्र की बहुत बड़ी नहर परियोजना प्लॉन्ट भी यहां बनाया गया है। सारे नियमों को तक पर रखकर जिम्मेदारों के द्वारा खनन माफिया को परमिशन दी गई है और हमारी धार्मिक भावनाओं को भड़काने के साथ में हमारी प्राकृतिक धरोहर को नष्ट करते हुए जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके अलावा यहां पर हमारे पालतू जानवरों के लिए गोचर भूमि भी हैं।
नियम को ताक पर रख कर कंपनी के नाम हुई थी लीज-
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि राजस्थान के मोडक में लेटराइट मिट्टी को ले जाने के लिए उदयपुर की बालाजी बालाजी माइंस सागर राज गुर्जर के नाम से यह लीज हुई थी। 2012 से लेकर 2019 तक लगातार ग्रामीणों ने इसका विरोध किया एवं आपत्तियां भी दर्ज कराई गई थी। ग्राम पंचायत में किसी प्रकार की सभा भी नहीं हुई और ऊपर ही ऊपर अधिकारियों की जेब गर्म होने के बाद में यहां पर लीज कर दी गई है।
ग्रामीण बताया कि प्रतिदिन 15 डंपर से खनन करके लाल मिट्टी को राजस्थान परिवहन किया जा रहा है और रोकने पर पुलिस के बल के द्वारा हमें डराया धमकाया जा रहा हैं। ज्ञापन दिया है तीन दिन बाद में सुनवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी ग्रामीणों ने दी है।
गांव पिछला के मंगल सिंह पंवार ने बताया कि मेरे द्वारा गांव वालों के साथ में जाकर खनन को रोकने की कोशिश की गई तो मुझे डराने धमकाने की कोशिश की गई। साथ ही पुलिस बल के द्वारा मुझे डराया गया। एफआईआर करने की धमकी दी गई। हम किसी भी हाल में यहां पर खनन नहीं होने देंगे। हमारी आने वाली पीढ़ी को हम परेशानियों का सामना उठाना पड़ेगा अगर यह पहाड़ खोदा गया तो, इसके अलावा यहां पर देवस्थान होने से हमारी धार्मिक भावना को आहत हो रही। ग्रामीण गोविन्द सिंह ने भी आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रख कर भाजपा के शासनकाल में भाजपा के नेताओं के संरक्षण में माइनिंग यहां पर की जा रही जिम्मेदारों की मिलीभगत सामने आ रही है। आपत्तियों के बाद जिस प्रकार खनन हो रहा है।
ग्रामीणों ने ज्ञापन दिया है 3 दिन में हमारी सुनवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
आपत्ति के बाद भी खनन आखिरकार क्यों हो रहा
पिछला निवासी धीरप सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश से राजस्थान में खनन का परिवहन किस आधार पर हो रहा है। क्या प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचा हो रहा है खनन माफिया एवं प्रशासन।
सोनिका सिंह तहसीलदार शामगढ़ ने बताया कि मामला ज्ञापन के माध्यम से मुझे प्राप्त हुआ है। मैं मामले की जांच करती हूं। कलेक्टर साहब के नाम से ज्ञापन दिया है। ग्रामीणों की समस्या का निराकरण कर दिया जाएगा।