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April 4, 2024, 11:42 am
NEWS : नए साल पर भौमाश्विनी, अमृत सिद्धि और अन्य शुभ योगों के साथ मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर भक्तों को देंगी आशीर्वाद, डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने कहा- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना प्रारंभ किया, पढ़े रेखा खाबिया की खबर

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चित्तौड़गढ़। सनातन वैदिक धर्म में नवरत्रि के पर्व का विशेष महत्व होता हैं। नवरात्रि पर लगातार 9 दिनों तक देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा उपासना की जाती हैं। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 09 अप्रैल से आरंभ होकर 17 अप्रैल तक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाती हैं। इसके साथ इस तिथि से ही नया हिंदू नववर्ष विक्रम संवत आरंभ होता हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती हैं, फिर अष्टमी और नवमी तिथि को छोटी कन्याओं की पूजा होती हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर आ रही हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और 9 दिनों तक अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी हर एक परेशानियों का दूर करती हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत बहुत ही शुभ और दुर्लभ संयोग में होने जा रही है।

चैत्र नवरात्रि 2024 पर शुभ योग
वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर 30 वर्षों बाद बहुत ही शुभ योग बनने जा रहा हैं। दरअसल 30 सालों बाद चैत्र नवरात्रि पर अमृत सिद्धि योग, शश योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अश्विनी नक्षत्र का संयोग बनेगा।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का है अत्यधिक महत्व
सनातन नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हैं। इस अवसर पर नववर्ष का स्वागत केवल मानव ही नहीं पूरी प्रकृति कर रही होती हैं। ॠतुराज वसंत प्रकृति को अपने आगोश में ले चुके होते हैं, पेड़ों की टहनियां नई पत्तियों के साथ इठला रही होती हैं, पौधे फूलों से लदे इतरा रहे होते हैं। खेत सरसों के पीले फूलों की चादर से ढंके होते हैं। किसलयों का प्रस्फुटन, नवचैतन्य, नवोत्थान, नवजीवन का प्रारंभ मधुमास के रूप में प्रकृति नया श्रृंगार करती हैं। कोयल की कूक वातावरण में अमृत घोल रही होती है। मानो दुल्हन सी सजी धरती पर कोयल की मधुर वाणी शहनाई सा रस घोलकर नवरात्रि में मां के धरती पर आगमन की प्रतीक्षा कर रही हो।

इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था
डॉ तिवारी के अनुसार हिंदू नववर्ष पूर्णतः वैज्ञानिक, शाश्वत और तथ्य पर आधारित हैं। इस तिथि का अपने शास्त्र में विशेष महत्व हैं। इस तिथि से ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। ब्रह्म पुराण में वर्णन हैं  चैत्रे मासी जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि। शुक्ल पक्षे समग्रेतु सदा सूर्योदये सति। अर्थात ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र मास के प्रथम दिन, प्रथम सूर्योदय होने पर की। इस शुक्ल प्रतिपदा को सुदी भी कहा जाता हैं। इस दिन से ही नौ दिवसीय चैत्र नवरात्र यानि वासंतिक नवरात्र का प्रारंभ होता है। इसमें सनातन समाज शक्ति की उपासना हेतु भक्ति में लीन होता है।

इस दिन का विशेष महत्त्व 
वर्ष प्रतिपदा के दिन ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार का जन्म हुआ। संघ की शाखाओं में आद्य सरसंघचालक प्रणाम दिया जाता हैं। शकारी विक्रमादित्य द्वारा परकीय विदेशी आक्रमणकारी शको से भारत को मुक्त करा कर नए विक्रमी संवत का प्रारंभ किया। महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की त्रेतायुग में प्रभु रामचंद्र जी ने राक्षसी आतंक का नाश और अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त कर रामराज्य की स्थापना की और इस तिथि को ही उनका राज्याभिषेक हुआ।
महाभारत के धर्म युद्ध में सत्य की विजय हुई और द्वापरयुग में इसी दिन युधिष्ठिर का राज्याभिषेक और युधिष्ठिर संवत का प्रारंभ हुआ और ग्रह और नक्षत्र में भी परिवर्तन होता है। भगवान गौर और गणेश की पूजा भी इसी दिन से तीन दिनों तक राजस्थान में की जाती है। हिंदू नववर्ष को महाराष्ट्र, कोंकण और गोवा के क्षेत्र में गुड़ी पड़वा, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना में उगादी, राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में थापना एवं सिंधी क्षेत्र में चेती चांद और जम्मू -कश्मीर में नवरेह नाम से मनाया जाता है।

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