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July 13, 2024, 1:36 pm
KHABAR : दिगबर जैन मंदिर में धर्म की ज्ञान गंगा प्रवाहित, वैराग्य सागर जी महाराज ने कहा- पाप कर्मों के त्याग के बिना मोक्ष गति नहीं मिलती, पढ़े खबर 

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नीमच। पाप कर्मों से पुण्य घटता है।  दुसरो के लिए परमार्थ  कार्य और परोपकार भलाई  सेवा से पुण्य बढ़ता है। इसलिए इसलिए सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए व पाप कर्म से सदैव बचना चाहिए। तभी हमारी आत्मा का कल्याण हो सकता है ।संसार से पाप पुण्य ही साथ जाते हैं अन्य कोई साथ नहीं जाता है। अंतरात्मा में झांके बिना मोक्ष मार्ग नहीं मिलता है।
यह बात आचार्य वैराग्य सागर जी महाराज साहब ने कही। वे दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर‌ में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि  जिस प्रकार  डॉक्टर की दवाई पर विश्वास होता है तभी हम स्वस्थ होते हैं उसी प्रकार तपस्या भक्ति और गुरु वाणी पर हमें विश्वास होगा तभी हमें उसका पुण्य लाभ मिल सकता है। धर्म कर्म क्रिया से आत्म शांति बढ़ती है और तनाव दूर होता है। और मन वचन काया स्थिर होती है। पशुओं के बंधन को देखकर ही नेमिनाथ ने अपने विवाह बंधन को त्यागने का संकल्प लिया था और एकांत में जाकर ध्यान लगाया और आत्म कल्याण के लिए  मोक्ष मार्ग की ओर अपने कदम बढ़ा दिए थे। संसार के पदार्थ से मोह रखने पर पुण्य नष्ट होते हैं। सम्यक दृष्टि जीव हमेशा अनासक्त भाव से रहता है।  गृहस्थी जीवन का अर्थ वासना की पूर्ति नहीं ,आत्म कल्याण के लिए मोक्ष मार्ग होना चाहिए।
मुनि  सुप्रभ सागर जी महाराज साहब ने कहा कि  सच्चा आनंद का सुख चाहिए तो मोक्ष मार्ग ही एकमात्र मार्ग है। त्याग के बिना आनंद नहीं मिलता है। संसार के लोग आनंद तो चाहते हैं लेकिन त्याग के लिए पड़ोसी के घर में भगत सिंह के जन्म की आशा करते हैं। संसार में आनंद कभी आ ही नहीं सकता है वहां दुःख ही दुःख ही मिलना है। संसार का मार्ग कठिन है ।मोक्ष मार्ग हाईवे की तरह सीधा होता है। संसार में रहते हुए दुर्घटना संभव है लेकिन मोक्ष मार्ग में दुर्घटना नहीं होती है। पाप कर्मों की निर्जरा के बिना मुक्ति नहीं मिलती है। मंदिर में किए गए पुण्य कर्मों से पाप कर्मों की निर्जरा होती है।झुठा भोजन नहीं छोड़ना चाहिए।इससे पाप बढ़ता है पुण्य घटता है।जैन कुल में जन्म मनुष्य को समाधि मरण के लिए मिलता है। मनुष्य को इसका सदुपयोग कर मोक्ष प्राप्त करना चाहिए। मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ। 21 जुलाई को मंगल कलश की स्थापना का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

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