इंदौर। बोहरा समाज पूरे देश में मोहर्रम का पर्व मनाता है। मोहर्रम की दस तारीख को कर्बला में इमाम हुसैन को जलती रेती पे तीन दिन के भूखे प्यासे को शिम्र ने शाहिद किया था। इंदौर के अल अकमर मोहल्ले में सूरत जामिया से पधारे हुसैन भाई साहब ने दस दिनों तक वाअज़ में इमाम हुसैन व उनके काफिले के साथ जो यजीद ने ज्यादतियां की उसके बारे मे बताया। आप ने कहा कि मोहर्रम की सात तारीख से इमाम हुसैन व उनके काफिले पे पानी बंद कर दिया। मोहर्रम की दस तारीख के दिन हजरत पैगम्बर साहब को दिए वादे के अनुसार इस्लाम को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। दोपहर तक अपना पूरा काफिला इमाम हुसैन पे कुर्बान हो गया। इमाम हुसैन अकेले बाकी रह गए।
हुसैन भाई साहब ने इमाम हुसैन की शहादत पड़ी। आप ने बताया कि कर्बला में इमाम हुसैन तन्हा रन के मैदान में खड़े है। चारों तरफ से तीर भालो की बौछार हो रही थी। आप जमीन पे गिरे शिमर ने सजदे में इमाम हुसैन को शहीद कर दिया। उन्हीं की याद में हर वर्ष मोहर्रम का पर्व मनाते है व इमाम हुसैन की प्यास को याद करके पानी, दूध, शरबत की छबील भी लगाते हैं।