मनासा। शिवलिंग भगवान शिव का सबसे प्राचीन प्रतीक है। जहाँ आप निराकार से आकार की और बढ़ते हैं। यह ब्रम्हांड और ब्रम्हांड के प्रतिनिधित्व का प्रतीक है। शिवलिंग का अर्थ सिर्फ़ शिव का होना ही नहीं है अपितु यह मूक रूप से प्रकट होने वाली और सदा गतिमान रहने वाली उस परम चेतना का भी प्रतीक है। इसके पूजन से जीवन में सफलता का सृजन होता है।
उपरोक्त उदगार नगर के श्री रामद्वारा में चातुर्मास में विराजित राम स्नेही संप्रदाय के आचार्य श्री रामदयाल महाराज के कृपा पात्र विद्वान युवा संत चेतनरामजी ने शिवपुराण कथा में शिवलिंग के महत्व व पूजन की विशेषताओं के संबंध में कथा श्रवण कर रहे सेकडो भक्तो को बतलाया।
शिव पुराण कथा का वृत्तांत सुनाते हुवे संत श्री चेतन राम जी ने भगवान शिव जिनके शिवलिंग की महत्ता व पूजन के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुवे बताया की मान्यता है कि ऐसा करने से घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है। सोमवार के दिन शिवलिंग की पूजा करना बेहद ही शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, बिल्व पत्र,पुष्प धतूरा, दूध और गंगाजल चढ़ाने से भगवान शंकर जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करता है बाबा भोलेनाथ उसके सभी कार्य पूर्ण करते हे। कथा पांडाल में शिव पुराण कथा के दौरान शिव भजनों की संगीतमय धुन पर उपस्थित भक्त नृत्य करने लगे थे। रामद्वारा में युवा संत चेतन राम जी के मुखारविंद से प्रतिदिन शिव पुराण कथा प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक हो रही हे जिसमे रोजाना सेकडो भक्त जन धर्म लाभ उठा रहे हे।