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July 27, 2024, 8:03 pm
KHABAR : दिगम्बर जैन समाज में चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित, वैराग्य सागर जी महाराज ने कहा- स्वाध्याय बिना विवेक उत्पन्न नहीं होता है, पढ़े खबर 

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नीमच। संसार में रहते हुए मनुष्य को प्रतिदिन धार्मिक ग्रंथो का स्वाध्याय करना चाहिए। यदि परिवार के सभी सदस्य धार्मिक ग्रंथ का अध्ययन करेंगे तो घर में सुख शांति स्वतः ही रहेगी। यदि विवेक और ज्ञान नहीं होगा तो हम संसार में भटक सकते हैं। जीवन में ज्ञान और विवेक से ही व्यक्ति क्रोध पर नियंत्रण कर सकता है। स्वाध्याय बिना विवेक उत्पन्न नहीं होता है। जन्म और मृत्यु व निवार्ण का मार्ग जिनवाणी दिखती है इसलिए प्रतिदिन प्रवचन में सहभागी बनकर जिनवाणी को श्रवण करना चाहिए और अपनी आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।

यह बात वैराग्य सागर जी महाराज साहब ने कही। वे पार्श्वनाथ दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर‌ में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सम्यक दृष्टि जीव का जीवन वैराग्यमय जीवन होता है चारों गतियों के दुरूखों का चिंतन करें तो कोई दुख नहीं मिलेगा तपस्या करेंगे तो अंत में दुख बचेंगे ही नहीं पुण्य ही हमारे पास होंगे तो दुरूख अपने आप मिट जाएंगे।

देश की आबादी के 25 प्रतिशत लोग आदिवासी हैं और वे लोग कई बार भूखे ही सो जाते हैं। वर्धमान सागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि सुप्रभ सागर जी मसा ने कहा कि द्रोपदी, माता सीता, चंदनबाला ने धर्म का पालन कर धर्म की रक्षा की तो धर्म भी हमारी रक्षा करेगा। कर्म किसी को नहीं छोड़ता है जो धर्म को साथ रखते हैं उनके जीवन में कभी संकट नहीं आता है धर्म हमें हमेशा सदैव निर्भय रहना सीखाता है। परम पूज्य चरित्र चक्रवर्ती 108 शांति सागर जी महामुनि राज के आचार्य पदारोहण के शताब्दी वर्ष मे परम पूज्य मुनि 108 श्री वैराग्य सागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि 108 श्री सुप्रभ सागर जी महाराज जी का पावन सानिध्य मिला। दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विजय विनायका  जैन ब्रोकर्स, मिडिया प्रभारी अमन विनायका ने उक्त‌ जानकारी ने दी।

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