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July 28, 2024, 12:06 pm
KHABAR : नगर के रामद्वारा में चातुर्मास में विराजित रामस्नेही युवा संत चेतन राम के सानिध्य में धर्म प्रेमी जनता को सत्संग का लिया अपार आनंद, पढे़ बद्रीलाल गुर्जर की खबर

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मनासा। नगर के रामद्वारा में चातुर्मास में विराजित रामस्नेही  युवा संत चेतन राम जी के सानिध्य में धर्म प्रेमी जनता को सत्संग का  अपार आनंद  प्राप्त हो रहा हे। कल रविवार को अपने मुखारविंद से आप ने पवित्र श्रावण मास में  शिव महापुराण कथा में ॐ शब्द की उत्पत्ति पंचाक्षर मंत्र का महत्व तथा पार्थिव शिवलिंग की महत्वता का वर्णन किया ।कथा के दौरान भोले बाबा के अनेक दृष्टांत देकर भक्तों को मंत्र मुक्त किया।


संत चेतन राम जी ने ॐ शब्द की सुंदर व्याख्या करते हुवे बताया की
तीन अक्षरों अ, ऊ, और म् से मिलकर बना ॐ ईश्वर के तीन स्वरूपों ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त रूप है। ॐ में ही सृजन, पालन और संहार तीनों शामिल हैं. ॐ शब्द के सच्चे मन से जीवन में  सही प्रयोग करने से हमारी हर समस्या दूर की जा सकती है. ओउम् के सही उच्चारण और जाप से ईश्वर को पाया जा सकता है। ॐ शब्द को ब्रह्माण्ड की सबसे महत्त्वपूर्ण और प्रभावी ध्वनियों में से एक माना गया है। ओंकार ब्रह्मनाद है, इसके उच्चारण व जाप से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। ओम ध्वनि एक शाश्वत ध्वनि है। जो ध्वनि टकराहट से पैदा नहीं होती, वह स्वयंभू ध्वनि है। इसे ही ‘अनहद नाद’ कहते हैं। ‘नाद’ का मतलब ध्वनि होता है। यह ईश्वर की ध्वनि है।


पार्थिव शिवलिंग की महत्ता को बतलाते हुवे संत श्री चेतन राम जी ने बताया  की कोई भक्त पूरी श्रद्धा और  भक्तिभाव से भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजा अर्चना करता हे तो भोलेनाथ उसकी सभी इच्छाओं पूरी करते हैं। पार्थिव शिवलिंग का अर्थ होता है मिट्टी से बना हुआ शिवलिंग। यह पूजा शिवलिंग की शुद्धता और साकारता को दर्शाती है और शिव भक्ति में अधिक साकार अनुभव कराती हे।


संत चेतन राम जी  की कथा में संगीतमय कथा में  विशाल जन समुदाय भक्ति भाव के साथ संगीतमय भजनों पर नाचते हुवे सत्संग का लाभ उठा रहे हे।

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