नीमच। उपदेश कल्पवल्ली जो इंद्रहंस गणिवर्य महाराज द्वारा रचित पुस्तक जिसमें श्रावक के गुण समाहित हैं। जयणा, जागृति व जिनवाणी। प्रवाहित प्रवचन श्रृंखला में श्रावक के गुण जिनवाणी पर प्रवचन फरमाते साध्वी सौम्यरेखा श्री.जी. मा.सा. की शिष्या साध्वी सुचिता श्री.जी. मा.सा. ने बताया कि हमारे भव रोगों को खत्म करने का सबसे सटीक माध्यम है।
जिनवाणी आपने बताया कि कैसे जिनवाणी के प्रभाव मात्र से आत्मा से परमात्मा बनने का रास्ता साफ हो जाता है। साध्वी जी ने कहा कि महावीर प्रभु को हम वितरागी कहते वितद्वेषी क्यों नहीं ? जबकि उन्होंने तो राग व द्वेष दोनों को जीता ? इस पर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि राग से ही द्वेष की उत्पत्ति होती है। जहां राग है वहां द्वेष अपने आप ही आ जाता है और जब राग पर विजय प्राप्त की तो द्वेष अपने आप ही खत्म हो जाता है महावीर प्रभु के जीवन में घटित संगम व चण्डकौशिया नाग के वृत्तांत सुनाकर उन्होंने इस बात को समझाया। साध्वी वर्या ने कहा कि अगर प्रभु के प्रति अहोभाव हो तो व्यक्ति 18 देश का अधिपति भी बन सकता है उन्होंने प्रभु भक्ति की महत्ता को कुमारपाल महाराज जो की 18 देश के अधिपति थे के पूर्व भव में 5 कोड़ी फूलों से की गई पूजा के प्रतिफल का वर्णन दिया।
उन्होंने श्रावक- श्रावकाओं से कहा कि परमात्मा के प्रति आस्था और प्रगाढ़ विश्वास इस आत्मा के कल्याण का सरल माध्यम है। इस बात को उन्होंने मानसिंह राठौर महाराजा व कर्जन के पालीताणा में घटित वृतांत के माध्यम से समझाया प्रवचन श्रृंखला में महापुरुषों की गाथा भी मा.सा. फरमाते हैं जिसमें आज आदिनाथ प्रभु जो की ईक्षवाकु वंश के राजा नाभिराया के पुत्र थे और यूगलिक थे का राज्याभिषेक हुआ और उन्होंने प्राणी मात्र को असि, मसि, कृषि सहित षट कर्माे की शिक्षा दी। हकार, मकार और धिक्कार से रूबरू करवाया। 84 लाख पूर्व के आयुष में 20 लाख पूर्व तक युवावस्था में रहे 83 लाख पूर्व तक संसारी व 1 लाख वर्ष तक दीक्षा में रहे जिसमें कर्मों की निरजरा कर मोक्ष गए और प्रथम तीर्थंकर कहलाए।
अंत में प्रवचन की प्रश्नोत्तरी हुई और सर्व मंगल के साथ प्रवचन को विराम दिया गया। महावीर जिनालय उपाश्रय में विराजित साध्वी वर्याओं का चातुर्मास गतिमान है और 40 के करीब 24 तीर्थंकर तप आराधक प्रतिदिन क्रिया कर रहे हैं। इस वर्ष ताप में सागर सामुदाय वर्तनी सरल स्वभावी दीघ्र संयमी परम पूज्य शील रेखा श्री जी मा.सा. की सुशिष्या परम पूज्य सौम्य रेखा श्री जी मा.सा. प.पू. सूचिता श्री जी मा.सा., प.पू. सत्वरेखा श्री जी मा.सा. आदि ठाणा-3 का सानिध्य मिल रहा है व धर्म आराधना तप तपस्या प्रवाहित है। श्री संघ अध्यक्ष राकेश आंचलिया व सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि प्रवचन प्रतिदिन 9ः15 से महावीर जिनालय उपाश्रम में प्रवाहित हो रहे हैं। समस्त समाज जन अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ लेवे।