नीमच। जिले में बांछड़ा समुदाय के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने की मांग विगत लंबे समय से लगातार उठाई जा रही है। सभी प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद पिता का रिकॉर्ड नहीं होने के कारण बांछड़ा समुदाय के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र के आवेदन निरस्त हो रहे है। जिसकी वजह से बांछड़ा समुदाय के बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। नीमच जिले में 2018 से लेकर 2022 के बीच इस समुदाय के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बन रहे थे। लेकिन विगत दो वर्षों से इनके जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं।
इसी संदर्भ में आज बांछड़ा समुदाय की युवतियां और महिलाएं लिखित आवेदन लेकर कलेक्टर कार्यालय और फिर विधायक निवास पहुंची। यहां विधायक दिलीप सिंह परिहार और एसडीम ममता खेड़े से मुलाकात कर बांछड़ा समुदाय के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र माता के नाम पर जारी करने की मांग की। बांछड़ा समुदाय की महिलाओं और उनके साथ आए जनशौर्य संस्था के सदस्यों का कहना था कि बांछड़ा समुदाय में महिलाएं और लड़कियां वेश्यावृत्ति में लिप्त है।यह प्रथा समुदाय में काफी समय से चली आ रही है। महिलाओं ने कहा कि वेश्यावृत्ति में लिप्त होने के कारण हमारे बच्चों को पिता की पहचान नहीं मिल पाने से हमको सामाजिक दर्ज नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण समुदाय के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में और अन्य योजनाओं के मामले में लाभों से वंचित रह जाते हैं। हमारे बच्चों को पिता की पहचान के अभाव में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल में छात्रवृत्ति के लाभ और छात्रावास में प्रवेश के लिए जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाने के कारण दोनों ही सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।
आवेदन में कहा गया है कि बांछड़ा समुदाय की हम यौन कर्मियों के द्वारा हमारे बच्चों के जाति प्रमाण पत्र के लिए जब हम आवेदन करते हैं तो गांव का मौजा पटवारी हमसे 1959 से पिता का रिकॉर्ड मांगता है। देह व्यापार में लिप्त होने के कारण हमारे कोई पति नहीं है। विधायक दिलीप सिंह परिहार ने बांछड़ा समुदाय की महिलाओं को आश्वस्त किया कि उनकी समस्या के समाधान की दिशा में वे कोशिश करेंगे। इस दौरान आकाश चौहान,श्याम मालवीय, अभिषेक, अविनाश, रमेश,देवकन्या मालवीय और बड़ी संख्या में बछड़ा समुदाय की युवतियां और महिलाएं उपस्थित रही।