नीमच। जीवन में शांति प्राप्त करना है तो सदैव पाप का त्याग करें और प्रभु के बताए मार्ग पर चलें। परमात्मा के उपदेशों पर श्रद्धा होती है। तप से शासन की प्राप्ति होती है। धर्म की प्राप्ति नहीं होने पर हमें भौतिक पदार्थ अच्छा लगता है। मोहनीय कर्म के कारण ही हमें घर परिवार सब कुछ अच्छा लगता है।
यह बात सुप्रभ सागर जी महाराज साहब ने कही। वे पार्श्वनाथ दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म की प्राप्ति नहीं होने पर हमें भौतिक पदार्थ अच्छे लगते हैं मोहनीय कर्म के कारण हमें घर परिवार सब कुछ अच्छा लगता है। जिन्हें मोह का नशा नहीं होता है, उन्हें संसार भयानक लगता है। हमें वीरांगना नहीं हो ऐसा जीवन जीना चाहिए हमें प्रभु का शासन मिला है तो मोक्ष की प्राप्ति के लिए उनके बताएं मार्ग पर चलना चाहिए। जीवन में शांति तो सभी चाहते हैं लेकिन प्रयास कोई नहीं करता है। यदि हम त्याग मार्ग को अपनाएंगे तो परिणाम उत्कृष्ट आएंगे।
मुनि वैराग्य सागर जी मसा ने कहा कि जीवन में मोक्ष और समाधि चाहिए तो मोन को अपनाये। उपवास की तपस्या शरीर को समाधि की ओर ले जाती है। मोन तपस्या करने पर दूसरे लोग जुड़ते हैं। बोलने वाले दूसरों को जोड़ते हैं। क्रोध बढ़ता है तो व्यक्ति का विवेक नष्ट हो जाता है क्रोध में कोई कार्य नहीं करना चाहिए क्रोध में अपना ही नुकसान होता है। समस्या का समाधान युक्ति से होता है क्रोध से नहीं। परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती 108 शांति सागर जी महामुनि राज के पदारोहण के शताब्दी वर्ष मे परम पूज्य मुनि 108 श्री वैराग्य सागर जी महाराज एवं परम पूज्य मुनि 108 श्री सुप्रभ सागर जी महाराज जी का पावन सानिध्य मिला। उक्त जानकारी दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विजय विनायका जैन ब्रोकर्स, मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने दी।