चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि हमें ज्ञान और ज्ञान के जानकार जो कि गुरु के समान होते हैं उनसे कभी घृणा भाव नहीं रखना चाहिए,ना उनका तिरस्कार करें, ना ही उनसे किसी तरह का दुराग्रह रखें क्यों कि ज्ञानियों ने बताया है कि यदि जानबूझ कर हम किसी को हेय दृष्टि से देखते हैं या किसी के प्रति तिरस्कार पूर्ण रवैया अपनाते हैं तो आगे चल कर उसका फल हमें भी भोगना पड़ता है और हमको भी वैसी ही परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। आज का विज्ञान भी कहता है कि प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया निश्चित होती है इसलिए यदि हम किसी से घृणा करते हैं तो यही घृणा लौट कर हमें परेशान करने लगती है अतः हमें चाहिए कि हम सभी के साथ अच्छा एवम् मधुर व्यवहार करें ताकि आगे चल कर हमको भी दुखी ना होना पड़े। इससे पूर्व महासती सत्यप्रभा ने बताया कि जिनेश्वर प्ररूपित धर्म के प्रति हमारी श्रृद्धा भक्ति जितनी मज़बूत होगी, उतनी जल्दी हम आत्म कल्याण के रास्ते पर आगे बढ़ सकेंगे। संचालन संघ मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।