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August 5, 2024, 7:13 pm
NEWS : गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में मनाया मरुधरासिंहनी महासाध्वी रत्ना नानूकंवर जी मसा का पुण्य स्मरण दिवस, उपस्थितों को शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती राजश्री जी ने किया संबोधित, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्म सभा में मरुधरासिंहनी महासाध्वी रत्ना नानूकंवर जी म. सा. का पुण्य स्मरण करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती राजश्री जी ने  कहा कि इस संसार में जन्म तो अनेकों आत्माएं लेती है परन्तु बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनकी विलक्षण प्रतिभा संपन्नता एवम्  दूरदर्शिता के कारण वे सबके प्रिय बन जाते हैं और जन मानस में अपनी विशिष्ट पहचान छोड़ जाते हैं। ऐसा ही नानू कंवर जी म सा का जीवन रहा। इस धरा पर जन्म और मृत्यु महत्त्वपूर्ण नहीं होकर इन दोनों के बीच का समय ज्यादा महत्त्वपूर्ण होता है, इस बीच के समय को जो अपने पुरुषार्थ से सार्थक कर लेता है वो अपना तो कल्याण करता ही है, अपने सान्निध्य में आने वाली आत्माओं को भी धर्म का मर्म समझा कर सही रास्ते पर आगे बढ़ा देता है। ऐसे ही थे हमारे नानू कंवर जी म सा जो संयम में हमेशा सजग रहते हुए सबके उपर अपने वात्सल्य भाव की बरसात करते रहते थे। वे अपने गुरु के प्रति सदा समर्पणा रखते हुए अपने से छोटे संत सती वर्ग को हरदम अपने ज्ञान का खजाना लुटाते रहते थे। वे संथारा साधिका होकर आज उनका 27 वा पुण्य स्मरण दिवस हम सब आयंबिल दिवस के रुप में मना रहे हैं। उनके विशिष्ट जीवन की कई विशेषताओं के कारण गणेशाचार्य ने उन्हें मरुधरासिंहनी की उपाधि से विभूषित किया, वहीं गणाधीपति शांति मुनि जी महाराज सा ने उन्हें जिनशासन विभूति के सम्मान से नवाजा। वे हमेशा संयम जीवन में गोल्ड मेडलिस्ट बने रहे। उत्कृष्ट त्याग वैराग्य एवम् निर्भीकता के कारण उनकी यशोकीर्ति आज भी हम सबको उनका अनुसरण करने की प्रेरणा दी रही है। इससे पूर्व महासती शीलप्रभा एवम् सत्यप्रभा ने उनके संयम जीवन की विशेषताओं पर विस्तार से बताया। धर्म सभा में संघ संरक्षक मोहन लाल पोखरना, लक्ष्मी पोखरना एवम् वंदना श्रीमाल ने भी उनका गुणानुवाद किया। संचालन मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।

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