नीमच। मानव जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार का लड़ाई झगड़ा हो तो प्रतिशोध नहीं लेना चाहिए गलती करने वाले को क्षमा कर महानता का परिचय देना चाहिए। यदि हमारे मन में प्रतिशोध की भावना रहेगी तो हमें पुण्य का फल कभी नहीं मिल सकता है। जीवन में मानव को पानी की तरह निर्मल रहना चाहिए और कभी भी बदला नहीं लेना चाहिए। सदैव सहयोगी बन कर रहना चाहिए। पड़ोसी मित्र परिचित और रिश्तेदार सभी के प्रति करुणा की भावना होनी चाहिए। किसी भी बात को लेकर उनके प्रति हिंसा का भाव मन में नहीं रहना चाहिए इससे भी पाप लगता है मौन व्रत शांति का प्रतीक है। यह बात साध्वी सोम्यरेखा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी सुचिता श्रीजी मसा ने कही।वे जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर श्री संघ के तत्वाधान में श्री महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन नीमच में आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर के जन्म पर 56 दिक कुमारियां प्रसन्नता के साथ भगवान के जन्म की सूचना देने आती है। तीर्थंकर के जन्म पर 400 योजन तक राग द्वेष का भाव नष्ट हो जाता है। हमें भी जीवन में राग द्वेष का त्याग कर देना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है।
400 योजन तक सभी को आनंद आता है। कभी मंदिर की अंजन शलाका कार्यक्रम हो तो भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त करना चाहिए तो अगले जन्म में हम वास्तव में भी तीर्थंकर के माता-पिता बन सकते हैं।इस वर्षावास में सागर समुदाय वर्तिनी सरल स्वभावी दीर्घ संयमी प.पू. शील रेखा श्री जी म.सा. की सुशिष्या प.पू.सौम्य रेखा श्री जी म सा, प.पू. सूचिता श्री जी म सा, प.पू.सत्वरेखा श्री जी म साआदि ठाणा 3 का चातुर्मासिक तपस्या उपवास जप व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हो गया है।श्री संघ अध्यक्ष राकेश आंचलिया जैन, सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि प्रतिदिन 9रू15 बजे चातुर्मास में विभिन्न धार्मिक विषयों पर विशेष अमृत प्रवचन श्रृंखला का आयोजन होगा । समस्त समाज जनअधिक से अधिक संख्या में पधार कर धर्म लाभ लेवें एवं जिन शासन की शोभा बढ़ावे।