चित्तौड़गढ़। प्रताप नगर सेवा केंद्र पर राजयोगिनी आशा दीदी ने बताया कि पार्वती जी की 100 वर्ष की तपस्या के पश्चात उनका शिव जी से मिलन हुआ। उन्होंने बताया कि जो मनुष्य आत्माएं परमात्मा की जितनी ज्यादा भक्ति करते हैं संपूर्ण निश्चय करते हैं उनको ही भक्ति का फल गति और सद्गति मिलती है। भक्ति का फल देने के लिए परमात्मा स्वयं इस धरती पर अवतरित होते हैं तथा सभी आत्माओं रूपी पार्वतीयों को 84 जनों की कथा ज्ञान देकर वापस घर पार वतन परमधाम अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के पश्चात सावन तीज को सर्वाधिक पवित्र त्योहार माना जाता है। इस समय परमात्मा धरती पर आते हैं तो मनुष्य आत्माओं को मनसा वाचा कर्मणा पवित्रता व शुद्धता धारण करने का ज्ञान देते हैं, जिस ज्ञान से सभी को मुक्ति और जीवन मुक्ति प्राप्त होती है, सभी आत्माएं अपने दुखों से छूट जाती है और अपने पवित्र धाम घर जाती है।