चीताखेड़ा। जो देश के पालनहार किसानों की जीवीको पार्जन हेतु 10-15 पीढियों से एवं जिन भूमिहिनो को शासन द्वारा भरण-पोषण हेतु दिए गए कृषि कार्य के लिए पट्टे वितरित किए गए उन पर देश की आजादी से पूर्व काबिज होकर खेती कर अपना परिवार पालते आ रहे हैं। इस जमीन पर खाद बीज का सहकारी सोसायटी से ऋण भी लेते देते रहे हैं। देश के पालनहार किसानों की भूमि को लगा ग्रहण और किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। आज उसी जमीन पर कभी कहीं राजनीतिक नेताओं तो कभी कहीं भू-माफिया तो कभी कहीं बाहूबलीयों द्वारा रजिस्टार, तहसीलदार और पटवारियों की मिली भगत से उक्त जमीनों को हथियाने के मामले आए दिन सुनने और देखने को मिल रहे हैं। उनकी पीड़ा को कोई सुनने वाला नहीं है।
चीता खेड़ा अंचल में विगत दिनों पूर्व गमेरपुरा, गोपालपुरा, पांवड़ा के किसान पांच से छह पीढियों से खातेदार पट्टे की जमीन पर खेती करते आ रहे थे उसी जमीन को एक पावरफुल राजनीतिक नेता द्वारा अपनी सत्ता और पद के पावर के दम पर रजिस्टार, तहसीलदार और पटवारियों की मिली भगत से उपजाऊ भूमि पर कब्जा कर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया है उन पीड़ितों को न्याय मिला ही नहीं और फिर चीताखेड़ा , गमेरपुरा निवासी कृषकों की पट्टे की उपजाऊ भूमि पर कब्जा कर किसी खनिज उत्खनन के प्रयोजन से राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर पट्टा प्राप्त कर लिया और इस आधार पर उक्त गरीब अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों से जमीन छीनने का प्रयास किया जा रहा है। नाथ जोगी घुम्मकड़ अनूसूचित जाति के लोगों को आज से 45-50 साल पूर्व गमेरपुरा और चीता खेड़ा के भूमिहीन गरीब लोगों को भरण-पोषण हेतु शासन द्वारा भूमि दान में देकर उनको पट्टे वितरित किए गए थे। उसी जमीन पर तभी से उक्त लोगों द्वारा जीवी को पार्जन हेतु एवं उसी जमीन पर मरणोपरांत भी श्मशान घाट (समाधि) स्थल भी है। ऐसी जमीन पर ऐसे गरीब अनुसूचित जाति के लोगों पर भी तनिक तरस नहीं आया और ऐसे लोगों की जमीन पर भू-राजस्व विभाग के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर बंशीनाथ पिता भागू नाथ निवासी चीता खेड़ा, मांगू नाथ पिता हिरानाथ निवासी चीता खेड़ा, रायका नाथ पिता मांगू नाथ निवासी चीता खेड़ा, मोती नाथ पिता मांगू नाथ निवासी चीता खेड़ा, पप्पू नाथ पिता अमरनाथ निवासी चीता खेड़ा, गोविंद पिता अमरसिंह बंजारा निवासी चीता खेड़ा, बबलू पिता रतनलाल मीणा निवासी गमेरपुरा की जमीन पर कब्जा करने के लिए खंबे गाड़ दिए गए हैं। इसी जमीन पर जोगी समाज में मरणोपरांत मोहनी बाई, कमलाबाई, अर्जुन नाथ, भागू नाथ की समाधि स्थल भी है। जिसकी शिकायत पीड़ित किसानों ने तहसीलदार जीरन, पुलिस सहायता केंद्र चीताखेड़ा, जनसुनवाई में जिला कलेक्टर श्री दिनेश जैन को भी कर अवगत कराया गया है लेकिन 10 दिनों बाद अभी तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई।
अनूसूचित जाति के घुम्मकड़ अनूसूचित जाति के पीड़ित बंशी नाथ ने बताया है कि मुझे शासन द्वारा 45 साल पूर्व यह जमीन और इसका पट्टा भी दिया गया था। तभी से मैं इस भूमि पर विगत 45 सालों से खेती कर परिवार का भरण पोषण करता आ रहा हूं मेरे पास इस जमीन के अलावा कोई जमीन नहीं है। मैं इस जमीन पर परिवार का भरण पोषण भी करता हूं और सहकारी सोसायटी से खाद बीज का ऋण लेन-देन भी करता आ रहा हूं। भी मेरे परिवार में मरणोपरांत सदस्यों को दफनाने हेतु शमशान एवं समाधि स्थल इसी जमीन पर करता हूं। मरणोपरांत मेरे पिताजी की समाधि भी यही पर है। विगत 10 दिनों पूर्व किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरी इस जमीन पर खनिज उत्खनन के प्रयोजन को लेकर अनजान लोगों द्वारा मेरी इस जमीन पर खंबे गाढ़ रहे थे रोकने पर उन्होंने मेरे साथ मारपीट भी की। और जमीन छोड़ने,जान से मारने एवं इसी जमीन में ज़िंदा गाड़ने की धमकी भी दी गई थी। जिसकी शिकायत मैंने जीरन तहसील, पुलिस थाना और जिला कलेक्टर को भी की गई लेकिन आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इनका कहना -
मेरे पास शासन द्वारा दी गई इस भूमि के अलावा कोई जमीन नहीं है। हमारी समाज में मरणोपरांत सदस्यों का अंतिम संस्कार करने, दफनाने हेतु शमशान घाट भी नहीं है इसलिए हम लोग हमारे परिवार में मरणोपरांत सदस्यों को भी इसी जमीन पर दफनाते (समाधि) स्थल बनाते हैं। मरणोपरांत मेरी माता जी मोहन बाई और बहू कमला बाई की समाधि स्थल भी यही है। और इसी जमीन पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
पीड़ित नारुनाथ जोगी, चीता खेड़ा।
मुझे शासन द्वारा भरण-पोषण करने हेतु डेढ़ बीघा जमीन अनुदान में पट्टे सहित दी गई थी तभी से मैं इस भूमि पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण करता आ रहा हूं। इस जमीन के अलावा मेरे पास कोई जमीन नहीं है। अगर यह जमीन भी छीन ली जाएगी तो मेरा परिवार भुखा मर जाएगा। मेरे साथ न्याय किया जाएं।
पीड़ित मोती नाथ जोगी ,चीता खेड़ा
अगर जो भी लोग उक्त जमीन को अपने खाते की जमीन बता रहे हैं तो कागज दिखाने पर ही पता चलेगा कि जमीन कहां तक है। अभी तक मेरे पास इस मामले में कोई भी किसान कागज लेकर नहीं आए है।
तहसीलदार नवीन गर्ग , तहसील जीरन