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August 10, 2024, 3:53 pm
NEWS : गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्मसभा का आयोजन, शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा श्रीजी ने कहा- आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में शनिवार को सुज्ञ श्रावक श्राविकाओं  को सम्बोधित करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने बताया कि आज़ हमारे चारों तरफ- घर में, समाज में, देश और विदेशों में बहुत ही निराशाजनक वतावरण बना हुआ है, लोगों की सहनशक्ति कम होती जा रही है। कोई कुछ उल्टा सीधा कह दे तो बिना सोचे समझे लड़ाई झगड़ा करने और यहां तक कि मार पीट करना भी आम बात हो गई है। आज़ हम कहीं भी बाहर निकलते हैं तो पड़ोस में, मोहल्ले में, रास्ते में अथवा गांव या शहर में ऐसे परिदृश्यों से सामना हो ही जाता है। इसका मुख्य कारण सहन शक्ति का कम होना है, ऐसी स्थिति से निराशा जनक और हताशा का वातावरण बनता है जो  कई जनों के दिमाग़ में असहनीय स्थिति पैदा करता है जिस कारण से उनके अंतर में आत्महत्या जैसे गलत विचार हावी होने लगते हैं। इसी तरह आज़ के बच्चे और युवा स्कूल, कॉलेज या कोचिंग संस्थान में अथवा कहीं और जगह पढ़ाई करने जाते हैं और मेहनत करने के बावजूद उनके कम नंबर आते हैं या वो किसी कारणवश चाही गई सफलता प्राप्त नहीं कर पाते हैं तो वे अवसाद ग्रस्त होकर कुंठाजनक परिस्थितियों का शिकार हो जाते हैं और आत्महत्या जैसा विचार उनके मन में आने लगता है । आज़ के माता पिता को चाहिए कि पढ़ाई के लिए बच्चों को भेजते वक्त उनको आश्वस्त करें कि तुम्हारा काम सिर्फ़ पढ़ाई में मन लगा कर मेहनत करने का है, सफलता मिले तो अच्छी बात है और नहीं भी मिले तो किसी भी तरह से घबराने या निराश होने की जरूरत नहीं है, जिंदगी में और भी कई काम है जो  करके एक खुशहाल और सफ़ल जिंदगी जी सकते हैं।यदि ऐसी पहल अध्यापन कराने वाले सभी गुरुजन ,माता पिता , रिश्तेदार और सभी समाज जन करेगें तो बच्चों में भय मुक्त वातावरण बनेगा जो परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बनेगा और आत्महत्या जैसे घिघोने अपराध की रोकथाम हो सकेगी । इससे पूर्व महासती सत्यप्रभा ने बताया कि सांसारिक रिश्ते बनाए रखने के लिए हमारे अन्दर विनम्र स्वभाव, सम्मानजनक भाषा, उदार भाव, पारदर्शिता, सही समझ और  नजरें नीची रखने का गुण होना चाहिए। महासती राजश्री जी ने धर्म सभा में उपस्थित सुज्ञ जनों से एकासने की पचरंगी में बढ़ चढ़ कर भाग लेने हेतु आह्वान किया। संचालन पारस सोनी ने किया।

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