नीमच। जैन धर्म व दर्शन में ऐसे कई वृतांत मिलते हैं। यदि पापी व्यक्ति भी धर्म व गुरु के संपर्क में आए तो वह उत्कृष्ट धर्म आराधना कर जीवन में सद्गति को प्राप्त कर सकता है। जब पापी व्यक्ति गुरु या धर्म के संपर्क में आता है तो वह व्यक्ति भले ही शास्त्रों का ज्ञाता ना हो लेकिन गुरु द्वारा कही हुई बात का चिंतन मनन कर उत्कृष्ट धर्म साधना के मार्ग की ओर पर्वत हो सकता है पापी व्यक्ति भी उत्कृष्ट धर्म की साधना करें तो उसकी अनुमोदना करो निंदा नहीं। अंहकारी व्यक्ति की कोई भी बात आपका कल्याण नहीं कर सकती।
यह बात साध्वी सोम्यरेखा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी सुचिता श्रीजी मसा ने कही। वे जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर श्री संघ के तत्वाधान में श्री महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन नीमच में आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि पवित्र भाव आते हैं तो क्रोध शांत होता है तथा मन समभाव की और पर्वत होता है इसलिए जीवन में गुरुजनों संतों की बातों का हमें अवश्य चिंतन मनन करना चाहिए इससे जीवन में परिवर्तन संभव है। अहंकार के कारण ही पतन की खाई बढ़ती है। आदिनाथ भगवान के छोटे 98 भाई पहले दीक्षा ले चुके थे लेकिन वे बाद में दीक्षित हुए। बाहुबली इसलिए अपने भाइयों के पास नहीं गए कि उन्हें उनके दीक्षित भाइयों को चरण वंदन करना पड़ेगा इस कारण उनके मन में अहंकार आ गया था फिर उन्होंने अहंकार का त्याग किया अहंकार का त्याग करने के बाद जब भी अपने भाइयों को नमन करने गए तो वहां केवल ज्ञान हो गया था अहंकार के त्याग के बाद ही जीवन में कल्याण होता है। इसलिए हमें जीवन में अहंकार को त्याग कर विनम्रता के मार्ग पर आगे चलना चाहिए तभी हमारे जीवन में कल्याण हो सकता है। प्रवचन के बाद साधु संतों के संयम धार्मिक उपकरण ओगा के धार्मिक चढ़ावे की बोली का धर्म लाभ मनोहर लाल अनिलकुमार संजय कुमार बेगानी परिवार ने लिया। महावीर जिनालय विकास नगर ट्रस्टश्री संघ पदाधिकारीयों द्वारा परिवार जनों का सम्मान किया गया। इस उपलक्ष्य में श्री संघ द्वारा गाजे-बाजे के साथ जुलूस महावीर जिनालय से उनके निवास तक ले जाया गया। जिसमें समाज जनों ने उत्साह के साथ सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का आभार ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश आंचलिया ने व्यक्त किया।
इस वर्षावास में सागर समुदाय वर्तिनी सरल स्वभावी दीर्घ संयमी प.पू. शील रेखा श्री जी म.सा. की सुशिष्या प.पू.सौम्य रेखा श्री जी म सा, प.पू. सूचिता श्री जी म सा, प.पू.सत्वरेखा श्री जी म साआदि ठाणा 3 का चातुर्मासिक तपस्या उपवास जप व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हो गया है। श्री संघ अध्यक्ष राकेश आंचलिया जैन, सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि प्रतिदिन 9.15 बजे चातुर्मास में विभिन्न धार्मिक विषयों पर विशेष अमृत प्रवचन श्रृंखला का आयोजन होगा । समस्त समाज जनअधिक से अधिक संख्या में पधार कर धर्म लाभ लेवें एवं जिन शासन की शोभा बढ़ावे।