चीताखेड़ा। सावन अर्थात वर्षा ऋतु का प्रथम मास। निरंतर टपकते बादलों और नयनाभिराम हरियाली वाला यह महिना केवल उल्लास का ही नहीं अपितु आशुतोष भगवान शिव जी की आराधना के लिए भी प्रसिद्ध है। भगवान शिव जो दिगंबर होते हुए भी अर्धनारीश्वर हैं, जो नरमुंड की माला धारण करते हुए भी गंगाधर हैं, जो शमशान वासी होते हुए भी देवाधिदेव हैं। शिव मृत्युंजय है, मृत्यु पर विजय पाने के लिए उन्होंने अमृत पान नहीं विषपान कर मृत्युंजय हुए। इसलिए वर्ष के 12 महीना में पूरा एक माह सावन मास में भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। इस वर्ष पवित्र श्रावण मास के चौथे सावन सोमवार को मध्य प्रदेश की सीमा से लगा राजस्थान के जलोदिया गांव के ग्रामवासियों के सहयोग से कांवड़ यात्रा निकाली गई।
भव्य कांवड़ यात्रा हर साल की तरह इस बार भी सावन माह के चौथे सावन सोमवार को प्रातः 10 बजे डीजे एवं ढोल ढमाकों के साथ चारभुजानाथ मंदिर से प्रारंभ हुई। 4किमी दूर स्थित देवाधिदेव भगवान आशुतोष रेवडा महादेव मंदिर तक डीजे के साथ भव्य पैदल कांवड़ यात्रा दोपहर डेढ़ बजे पहुंची। कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत सत्कार किया गया। वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा स्वल्पाहार एवं पेयजल व्यवस्था भी सराहनीय की गई। कांवड़ यात्रा में पुलिस प्रशासन की ओर से छोटीसादडी पुलिस थाना प्रभारी अनिल देवल के मार्गदर्शन में एएसआई अर्जुन सिंह, एएसआई शिवराज सुरक्षा दृष्टि से पूरे समय कांवड़ यात्रा में मुस्तैद रहे। कांवड़ यात्रा में मुख्य रूप से महूडिया, बरखेड़ा, जलोदिया और केलूखेडा गांव के बड़ी संख्या में कांवड़िये एवं अन्य भक्तजन डीजे ढोल ताशों के साथ बोल बम बम.......,जय श्री महाकाल.........,हर हर महादेव.......भोले शंभू भोले नाथ.... जयघोष करते नाचते झुमते हुए गांव के विभिन्न मार्गों से परिभ्रमण करते हुए रेवडा महादेव मंदिर पहुंचे। जहां सभी ने भोलेनाथ का जलाभिषेक,पाठ पुजा की। कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले सभी महानुभावों के लिए महाप्रसाद के रूप में सामुहिक भण्डारे का आयोजन गांव के ही जाट समाज द्वारा किया गया। भण्डारे में हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया।
भव्य कांवड़ पैदल यात्रा में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक देखी गई। कांवड़ यात्रा में छोटे बच्चे युवा बुजुर्ग महिला- पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कंधे पर कांवड़ लेकर रेवडा महादेव के दरबार पहुंची। कांवड़ में लेजाया गया जल से अभिषेक किया व पूजा अर्चना कर क्षेत्र एवं अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं पूजारी द्वारा भगवान भोलेनाथ का किया गया आकर्षक श्रंगार का दर्शन लाभ लिया।भोलेनाथ के दिव्य दर्शन कर उनके तक पहुंचाने हेतु नंदी से उनके कान में अपनी मनोवांछित कामना पूर्ति के लिए विनती की।