मनासा। स्थानीय जैन उपाश्रय में चातुर्मास हेतु विराजित प्रवचन प्रभाविका परम् पूज्य सौम्ययशा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 5 की पावनकारी निश्रा में धर्म,ध्यान एवं तप का ठाठ लग रहा है। तपस्या की कड़ी में आज बाबेल परिवार महागड़ वालों की बहू सुषमा बेन बाबेल ने नवम तप की तपस्या पूर्ण की। तपस्या के पारने के पश्चात तपस्वी बेन के अनुमोदनार्थ उपाश्रय में चोवीसी,व्याख्यान एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। ततपश्चात साधर्मिक स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी किया गया। इधर नगर की 14 बहनों को सन्तिकरन तप की तपस्या भी चल रही है।
जैन धर्म में त्याग और तप का क्या महत्व है इस विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुए पूज्य सौम्ययशा श्रीजी म.सा.ने कहा कि हम धर्म राग एवं देव राग से विमुख होते जा रहे है और देह राग में लिप्त होते जा रहे है। उत्तम आत्मा की सेवा करने के लिए देवलोक से देवता भी आते है। परमात्मा वीतरागी है। हमारे तपस्वी उत्तम आत्मा की ओर अग्रसर है। जिस परिवार के सदस्य ने तप के मार्ग को अपनाया है वो धन्य है,जिनसाशन देव की कृपादृष्टि उस पर सदैव बनी रहेगी। आप सब से भी अनुरोध है कि ये चातुर्मास ह्रदय के मेल को धोने आया है अतः इसमें मन की जितनी सफाई करनी है कर लो अन्यथा पछतावा होगा।