चीताखेड़ा। श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर रक्षाबंधन के दिन 90 वर्षों बाद 6 शुभ महासंयोग (सावन सोमवार, सावन पूर्णिमा, सावन श्रवण नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि रवि, शोभन और राज पंचक योग) बने, जिनके तहत बहनों ने भाईयों की कलाई पर अटूट प्रेम की रेशमी डोर बांधी। भद्रा काल दोपहर डेढ़ बजे तक था, जिसके बाद शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। भाइयों ने बहनों को जीवन यात्रा में मार्गदर्शन और समर्थन देने का वचन दिया।
रक्षाबंधन के इस पर्व पर बाजार में महंगाई की छाया साफ नजर आई। पिछले वर्षों की तुलना में राखियों की कीमतों में वृद्धि देखी गई, जिससे गरीब तबके के लोगों में उत्साह कुछ कम नजर आया। आधुनिकता और फैशन के दौर में, पारंपरिक रेशमी और सूती राखियों की जगह फैंसी राखियों ने ले ली है, जैसे कि कार्टून और वीडियो गेम थीम वाली राखियां। इस बार बाजार में 5 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की राखियां उपलब्ध थीं।
क्षेत्र में कम बारिश के चलते त्योहारी बाजार की रौनक भी प्रभावित हुई। मिठाई व्यापारी गणेश बेनिवाल और ईश्वर लाल माली ने बताया कि ग्राहकों की संख्या तो ठीक रही, लेकिन खरीदारी में कमी देखी गई। कपड़ा व्यापारी रजनीश दक ने भी बताया कि इस वर्ष कपड़े के व्यवसाय में कमी आई है। हालांकि, महंगाई और मौसम की चुनौतियों के बावजूद, रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहन ने अपने रिश्ते को और भी मजबूत किया और एक-दूसरे को उपहार और मिठाई देकर खुशियों का आदान-प्रदान किया।