चित्तौड़गढ़। जिला मुख्यालय से मात्र 18 किमी की दूरी पर स्थित एक छोटा सा ग्राम आवंलहेड़ा जो पूर्व में चित्तौड़गढ़ तहसील में था लेकिन वर्तमान में नवीन तहसील बस्सी हो जाने से बस्सी में स्थित है। उस र्ग्राम में भगवान श्री चारभुजा नाथ का 200 वर्ष पुराना चमत्कारी मंदिर हैं जहां पर यह परम्परा चली आ रही हैं कि ग्रामीण लोग वहां पर अच्छी बारिश की कामना एवं आने वाली बीमारी एवं प्राकृतिक आपदा से समस्त जीवों की रक्षा हेतु पूरे सावन माह में प्रतिदिन एक घण्टा एवं श्रावण मास के अंतिम दिवस यानि श्रावण मास की पूर्णिमा (रक्षाबन्धन के दिन) पूरे दिनभर अखण्ड रामधुन होकर उसकी पूर्णआहूती के अवसर पर भगवान की शोभायात्रा पूरे गांव में निकाली जाती हैं साथ ही महाआरती के बाद प्रसाद विरतण किया जाता हैं। शोभायात्रा में भगवान की सवारी के साथ-साथ गाजे-बाजे, ढोल नगाडे डीजे आदि साथ में चलते हैं। यह पूरा महोत्सव ग्रामीण पूरे जोश, श्रद्धा-भक्ति व समर्पण के साथ मनाते आ रहे हैं।
मंदिर के पुजारी उदयदास ग्रामवासी देवाराम डीडवानिया, सुखलाल डीडवानिया, खेमराज डीडवानिया, श्यामलाल राव, राधेश्याम राव, जमनलाल डीडवानिया, रतनलाल, राजेन्द्र, विष्णुचरण राव, रविकुमार राव ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उस परम्परा का पालन करते हुए गुरू पूर्णिमा से लेकर पूर्णिमा (रक्षा बन्धन) तक रामधुन का आयोजन हुआ। शुक्रवार को पूर्णाहूति होकर शाम को भव्य शोभायात्रा निकाली गयी और महाप्रसादी के साथ समापन हुआ।