सरवानिया महाराज। विगत दिवस जिला मुख्यालय कार्यालय नीमच में कलेक्ट्रेट परिसर में जिले की मध्यान भोजन एवं आंगनबाड़ियों का संचालन करने वाली स्व सहायता समूह से जुडी महिलाओं ने बढ़ती मंहगाई के चलते शासन से गुहार लगाते हुए कहा कि आप खुद ही फ़ैसला कर बताएं की इतने कम पैसों में हम बच्चों को कैसे खाना उपलब्ध कराएं मार्केट में हरी सब्जियों के आसमान छूते भाव, ऊपर से तेल और दाल के रेट सुनकर ही समझ नहीं आता है कि हम कैसे बच्चों को मेनू अनुसार भोजन दें, साथ ही भोजन पकाने ईंधन गैस सिलेंडर के रेट भी कम नहीं होने का नाम ले रहें और ऊपर से जो राशिजारी की जाती है। वह भी समय परनहीं मिलतीरसोईया का मानदेय भी दो दो माह से नहीं मिलता स्व सहायता समूह कि जिलाअध्यक्ष माया मनोहर बैरागी ने बढ़ती हुई महंगाई के विषय में अपनी महत्वपूर्ण बात रखी गई जो इस प्रकार है।
एक किलो आलू कीमत प्रति 40 रु
एक किलो टमाटर कीमत प्रति 80 रु
एक लीटर सोयाबीन तेल कि कीमत 130 रु
एक लीटर दूध कीमत 60 रु.एक किलो/लीटर
शक्कर कीमत 45 रु
एक किलो अरहर दाल कीमत 160 से 190 तक
एक किलो मूंग दाल कीमत 140 से 150 तक
एक किलो बेंसन कीमत 100 रु
एक किलो चना दाल कीमत 70 रु
एक किलो काबली चना कीमत 80 रु
एक किलो धना कीमत 180
एक किलो लाल मिर्च पाउडर कीमत 250 रु
एक किलो हल्दी पाउडर कीमत 220
एक गैस सिलेंडर कीमत 830 लाने ले जाने खर्च $70=900 रु
इतनी महंगाई में प्राथमिक शाला में शासन द्वारा निर्धारित-’दर 5,45 एवं मा वि में 8.17 रू प्रति बच्चे क्या इतनी महंगाई में अच्छी क्वालिटी में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम संचालित कर पाना संभव नहीं है एक कप चाय भी₹10 से कम में नहीं मिलतीऔर समूह वालों को 5 और 8 मेंबच्चों को दो सब्जी रोटीएवं भरपेट भोजन देना होता हैऔर इसी पैसे मेंमंगलवार के दिन खीर पुरीऔर शनिवार के दिन पराठे देना होते हैंयह कैसे संभव है शासन द्वारा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा।