BREAKING NEWS
KHABAR : शासकीय अनुसूचित जाति सीनियर छात्रावास का.. <<     KHABAR : हथकरघा को प्रोत्साहन, महिलाओं को सम्मान,.. <<     BIG NEWS : मंदसौर जिले में दर्दनाक सड़क हादसा,.. <<     KHABAR : सोशल मीडिया पर देखी सेवा की मिसाल, 230.. <<     REPORT : मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत.. <<     BIG NEWS : दतिया हार के बाद दिल्ली में एमपी बीजेपी.. <<     KHABAR : मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का जिले.. <<     KHABAR : बीमार पत्नी को गोद में लेकर एसपी कार्यालय.. <<     KHABAR : शिवपुरी में पत्नी और नाबालिग बेटी की.. <<     REPORT : अपर संचालक बलवंत वर्मा ने किया.. <<     KHABAR : मनासा के उषा गंज स्थित श्रीराम मंदिर.. <<     KHABAR : नवोदय की उड़ान में गैलेक्सी लिटिल स्टार का.. <<     GOLD & SILVER RATE : यहां क्लिक करेंगे तो जानेंगे प्रदेश.. <<     HOROSCOPE TODAY : इन 4 राशि वालों का किस्मत देगी साथ, धन.. <<     KHABAR : मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के शुभारंभ.. <<     NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
October 3, 2024, 2:25 pm
KHABAR : 150 साल पुराना है मांढरे वाली माता मंदिर, सिंधिया घराने की कुलदेवी अष्टभुजा वाली मां काली की बहुत ही अद्भुत है प्रतिमा, पढे़ खबर 

Share On:-

ग्वालियर। गुरुवार से नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हो गई है। नवदुर्गा में मंदिरों पर देवियों के दर्शन करने सुबह से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। ग्वालियर में जब बड़े और सिद्ध मंदिरों की चर्चा होती है तो कैंसर पहाड़िया पर स्थित 150 साल पुराने सिंधिया राजघराने की कुलदेवी मांढरे वाली माता मंदिर का जिक्र होना लाजिमी है।


शहर में मांढरे वाली माता का मंदिर काफी पुराना है और इस मंदिर की स्थापत्य कला तो अद्वितीय है ही, लेकिन अष्टभुजा वाली मां काली की प्रतिमा सबसे दिव्य और अद्भुत है। कहा जाता है कि महिषासुर मर्दिनी माता महाकाली की कृपा के कारण ही सिंधिया राजवंश का आज तक पतन नहीं हुआ, जबकि भारत के ज्यादातर राज रजवाड़े विलुप्त हो चुके हैं।


ग्वालियर शहर के कैंसर पहाड़ी पर स्थित यह मांढरे वाली माता का मंदिर 150 साल पुराना है। मंदिर की स्थापना के पीछे भी रोचक कहानी है। सिंधिया रियासत के एक कर्नल को मां ने सपना दिया था। उसके बाद तत्कालीन महाराज ने यह मंदिर का निर्माण कराया था। सिंधिया महल में एक विशेष खिड़की है, जहां से सीधे मां के दर्शन होते हैं। यह सिंधिया घराने की कुलदेवी हैं। इसलिए यहां नौ दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस मंदिर में पूजा अर्चना का विशेष महत्व भी है।


150 साल पहले हुई थी मंदिर की स्थापना
ग्वालियर के कैंसर पहाड़िया रोड पर स्थित 150 साल पुराने इस मंदिर की स्थापना सिंधिया राजवंश के कर्नल रहे आनंद राव मांढरे ने की थी। आनंद राव मांढरे महाराष्ट्र के सतारा के बायपास रोड पर स्थित प्राचीन मांढरे वाली माता के परम भक्त थे। जब सिंधिया रियासत में वे यहां पदाधिकारी बनकर ग्वालियर आए तो अपने साथ माता को भी यहां लेकर आए थे। मांढरे वाली माता की मान्यता है कि एक दिन आनंद राव को माता ने सपने में दर्शन दिए और किसी अच्छे स्थान पर प्राण प्रतिष्ठा कराने के लिए मांढरे से कहा, इस पर उन्होंने तत्कालीन महाराजा को सपने में माता के आदेश के बारे में बताया। महाराजा सिंधिया के प्रयासों से कैंसर पहाड़िया पर इस मंदिर की स्थापना की गई।


महल जयविलास पैलेस से 1 किलोमीटर दूर होने के बावजूद महल की एक विशेष खिड़की से माता के दर्शन सिंधिया राजपरिवार के सदस्यों को होते थे। इस प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मुराद मांगने पर वह जरूर पूरी होती है। यहां बड़ी संख्या में महिला पुरुष और बच्चे आते हैं।


दशहरे पर होता है शमी पूजन
दशहरे पर होता है शमी का पूजन मंदिर के व्यवस्थापक मांढरे परिवार के अनुसार इस मंदिर पर लगे शमी के वृक्ष का प्राचीन काल से सिंधिया राजवंश दशहरे के दिन पूजन किया करता है। आज भी पारंपरिक परिधान धारण कर सिंधिया राजवंश के प्रतिनिधि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने बेटे तथा व सरदारों के साथ यहां दशहरे पर मत्था टेकने और शमी का पूजन करने आते हैं।


मंदिर आए भक्तों का कहना
मांढरे वाली माता के दर्शन करने आई सोभा मैं आज मांढरे की माता के मंदिर आई हूं मांढरे की माता का नाम बहुत है। यह हमारे मराठाओ का ही मंदिर है, माता से जो भी मन्नत मांगों को पूरी हो जाती है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE