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November 13, 2024, 4:58 pm
KHABAR : विधान पुजा आत्मा को पवित्र करने का सशक्त माध्यम-वैराग्य सागर जी मसा, विधान की पूर्णता जीवन में पूर्णता लाती है -सुप्रभ सागर जी मसा, पढे़ खबर 

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नीमच। विधान पुजा करने से मन पवित्र होता है। विधान  करने से पुण्य का फल बढ़ता है। पाप कर्म नष्ट होते है। परिवार में सुख समृद्धि व आत्म शांति बढ़ती है। तनाव दूर होता है जीवन में सुख शांति की अभिवृद्धि होती है। विधान आत्मा को पवित्र करने का सशक्त माध्यम होता है। यह बात मुनि वैराग्य  सागर जी महाराज ने कही। वे श्री सकल दिगंबर जैन समाज नीमच शांति वर्धन पावन वर्षा योग समिति नीमच के संयुक्त तत्वाधान में श्री शांति सागर मंडपम दिगंबर जैन मंदिर नीमच में‌ अष्टानिका महापर्व गणधर वलय विधान कार्यक्रम मेंआयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विधान का फल अनेक रोगों को मिटा कर मनुष्य के शरीर को स्वस्थ बनाता है।


दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विजय जैन विनायका जैन ब्रोकर्स, मीडिया प्रभारी अमन जैन विनायका ने बताया कि आचार्य वंदना आरती के साथ हुई। सुबह 6रू45 बजे मंगलाष्टक विधान से प्रारंभ हुआ ।विधानाचार्य बाल ब्रह्मचारी भैया जी भावेश जैन ने गणधर वलय विधान करवाया। और संगीतकार प्रथम जैन दमोह ने विभिन्न भजन प्रस्तुत किये। गणधर गंणधर वलय विधान में समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया।


मुनि सुप्रभ सागर जी मसा ने कहा कि विधान की पूर्णता जीवन में पूर्णता लाती है ।विधान जीवन को रत्न जड़ित बनाता है। सम्यक शुद्ध चरित्र, शुद्ध दर्शन शुद्ध ज्ञान शुद्ध ज्ञान चरित्र की पूर्णता लाता है। जिस प्रकार रोगी डॉक्टर पर पूर्ण विश्वास रखता है और वह स्वस्थ हो जाता है ठीक इसी प्रकार यदि मनुष्य आत्म कल्याण के लिए परमात्मा की भक्ति तपस्या पर पूर्ण विश्वास करें तो उसकी आत्मा का कल्याण हो सकता है कि जिस दिन मनुष्य को देवगुरु शास्त्र पर पूर्ण विश्वास हो जाएगा उस दिन उसकी मुक्ति का मार्ग खुल जाएगा।


गुरु आज्ञा चाहे कितनी भी कठिन क्यों ना हो उसे स्वीकार करना चाहिए तभी हमारे जीवन में कल्याण का मार्ग मिल सकता है।  गुरु जब भी आज्ञा प्रदान करते हैं तो वह दूसरों की भलाई के लिए ही आज्ञा देते हैं। जिस प्रकार एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा को ही गुरु मानकर धनुर्विद्या में अभ्यास किया और जीवन में सफलता की ऊंचाई के शिखर को प्राप्त किया था। इसी प्रकार हमारा  देव गुरु और शास्त्र के प्रति हमारा दृढ़ विश्वास होना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। धर्मशाला मंदिर और उपाश्ररो में दिया गया दान सार्थक पुण्य फलदाई होता है। जीव दया और अहिंसा का पालन करना धर्म होता है। देश के अनेक नागरिक जब धर्म कर्म का अवसर आता है तो बार-बार विचार करते हैं लेकिन जब पाप कर्म सांसारिक काम आते हैं तो बिना सोचे समझे ही कर्म शुरू कर देते हैं चिंतन का विषय है। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुलदीप जैन भी पहुंचे और मंदिर दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।

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