नीमच। बांछड़ा समुदाय के लिए जो लर्निंग सेंटर शुरू किए जा रहे हैं,वहां पर सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए खास तौर पर 10 से 20 वर्ष की आयु के बच्चों पर फोकस किया जाए। ताकि उनका भविष्य बर्बाद ना हो। यह बच्चे नया समाज बनाएंगे। इन्हें स्वाभिमान के साथ जीना सिखाईये।
यह बात प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह राजपूत ने बांछड़ा समुदाय के लर्निंग सेंटर के लिए वॉलिंटियर्स की चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कही।यह प्रशिक्षण कार्यशाला जन शौर्य सोशल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और चिल्ड्रन टॉय फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में मनासा रोड स्थित माउंट ज़िओन स्कूल में हुआ।
इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश आलोक सक्सेना ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज को कुरीतियों से बाहर निकालने के लिए हमें साक्षरता के साथ उचित विकल्प देना होगा। प्रथम जिला न्यायाधीश राकेश कुमार श्रवण ने कहा कि ऐसा कोई समुदाय नहीं जिसमें विसंगति ना हो। विसंगति में सुधार लाने से बेहतर कोई धार्मिक कार्य नहीं हो सकता। सीजेएम रवि कुमार बौरासी ने अपने संबोधन में जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि देहव्यापार के कार्य में अरुचि दिखाई जाए। हमें पेट पालने के लिए अन्य उचित माध्यम अपने होंगे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शोभना मीणा ने कहा कि शरीर आपका मंदिर है, आपकी मर्जी के बिना इसे कोई छू नहीं सकता। चंद पैसों के लिए इसे किसी के हवाले ना किया जाए। इस अवसर पर चिल्ड्रन टॉय फाउंडेशन ने आनंद ही आनंद है गीत प्रस्तुत किया। उल्लेखनीय है कि समुदाय में जागरूकता लाने के लिए नीमच मंदसौर और रतलाम के बांछड़ा बाहुल्य 65 गांव में लर्निंग सेंटर और लाइब्रेरी की स्थापना की जा रही है। इसी के चलते आज से वॉलिंटियर्स की चार दिवसीय ट्रेनिंग आयोजित की गई है। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट लक्ष्मण सिंह भाटी ने किया।