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March 8, 2025, 5:28 pm
KHABAR : नीलामी प्रक्रिया अवैध और अनुचित, सीसीआई को स्क्रैप किसने बनाया?, सरकारी क्षेत्र में ही पुनः चलाया जाए, बाद में बची हुई जमीन औने-पौने दाम में उद्योगपतियों को बेचने की आशंका, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू ने लगाया आरोप, पढ़े खबर 

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नीमच। आज दिनांक 8 मार्च को जारी है एक संयुक्त प्रेस नोट में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ठाकुर ,जिला कार्यकारी अध्यक्ष किशोर जवेरिया जिला इंटक काउंसिल के अध्यक्ष भगत वर्मा, सीमेंट श्रमिक संघ के महासचिव निर्भय राम चौहान और संयुक्त ट्रेड यूनियन के शोभाराम धाकड़ ने बताया कि सीमेंट कॉरपोरेशन आफ इंडिया सीसीई की नयागांव स्थित फैक्ट्री के कथित स्क्रैप की निलामी सरासर गलत और अवैधानिक है।
 ट्रेड यूनियन पदाधिकारीयों ने संयुक्त बयान में बताया कि 1980 में स्थापित नयागांव सीमेंट फैक्ट्री एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है और इसकी किसी भी संपत्ति को बेचने की एक प्रक्रिया है। वर्तमान में आशंका है कि उपरोक्त निलामी प्रक्रिया  अनुचित ही नहीं अवैधानिक भी है और इसमें स्थापित नियमों का पालन भी नहीं किया गया है।
1उपरोक्त प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। नीलामी की प्रक्रिया सिर्फ टेंडर भरने वाले ही देख सकते हैं और उसमें भाग ले सकते हैं।जबकि इसे प्रारंभ करने से पूर्व स्थानीय अखबारों में इस आशय की नीलामी सूचना/खबर छपवाना एवं फैक्ट्री के बाहर बोर्ड अथवा बैनर पर बड़े अक्षरों मेंसूचना प्रदर्शित की जानी चाहिए थी जो कि नहीं की गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
2 इसी तरह से सीसीआई सीमेंट फैक्ट्री नयागांव में वर्तमान में जो सुरक्षा गार्ड कार्यरत हैं उनके नियमितीकरण का मामला सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल जबलपुर में चल रहा है वहां भी इस निलामी की किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई है।
3 एक अन्य प्रकरण में लगभग 90 लोडर के पक्ष में माननीय श्रम न्यायालय मंदसौर मध्य प्रदेश, उसके पश्चात औद्योगिक न्यायालय इंदौर मध्य प्रदेश द्वारा अवार्ड पारित कर प्रत्येक लोडर को 30 लाख रुपए जो ब्याज सहित सभी को कुल करीब 30  करोड रुपए के भुगतान का आदेश दिया गया है ।इस मामले में प्रबंधन द्वारा हाई कोर्ट इंदौर में लगाई गई याचिका भी खारिज हो चुकी है। तत्पश्चात श्रम न्यायालय मंदसौर द्वारा कलेक्टर नीमच को कंपनी की संपत्ति कुर्की करने के आदेश दिए गए थे जिस पर कार्रवाई करते हुए  कलेक्टर महोदय द्वारा तहसीलदार जावद को कार्रवाई हेतु अधिकृत किया था जो पिछले13 महीने से लंबित है। न्यायालय तहसीलदार में भी इस नीलामी प्रक्रिया की कोई सूचना नहीं दी गई।
4 एक और अन्य प्रकरण में जिसमें सीसीआई नयागांव क्लोजर (बंद करने की प्रक्रिया) को ही चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय दिल्ली में डबल बेंच में प्रचलित है। वहां पर भी इस  नीलामी प्रक्रिया की कोई सूचना नहीं दी गई है। ।अतः यह नीलामी प्रक्रिया अवैध है।
यहां प्रश्न यह उठता है  कि चार लाख मेट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता का यह संयंत्र जिसकी विस्तार की संभावना 10 लाख टन प्रतिवर्ष तक की थी। केवल 9 करोड़ 50 लख रुपए का बिजली का बिल ना भरे जाने के करण चलना बंद हो गया और जनप्रतिनिधियों केंद्र सरकार और कुछ निजी कंपनियों का हित साधने वाले भ्रष्ट अधिकारियों की अरुचि के चलते आज तक नहीं चल पाया। बिजली का बिल न भर पानी के कारण कोई फैक्ट्री नहीं चल पा रही है यह बात गले से नीचे नहीं उतरती जबकि कई निजी उद्योगों के लाखों करोड़ों रुपए के बिल सरकार द्वारा माफ किए जाते हैं। क्या इसके पीछे कोई षड्यंत्र नजर नहीं आता?
 2014 में सीमेंट कॉरपोरेशन आफ इंडिया की अधिकारी यो के संगठन ने भारी उद्योग मंत्रालय को एक पत्र लिखा था। जिसमें कई जनरल मैनेजर सहित अधिकारियों के हस्ताक्षर थे ,कि सीमेंट कॉरपोरेशन आफ इंडिया नयागांव और अन्य संयंत्र को चलाया जाना देश के और कारपोरेशन के हित में होगा और इसके समस्त कारण भी दिए थे लेकिन फिर भी एशिया की सबसे उच्च गुणवत्ता का लाइमस्टोन और पानी की प्रचुर मात्रा वाले नयागांव संयंत्र को नहीं चलाया जाना दुर्भाग्य जनक ही नहीं दंडनीय भी है ।नीमच की जनता को अच्छी तरह से ज्ञात है कि जब नीमच में पानी की कमी हुई थी तो सीसीआई नयागांव के पानी के स्रोतों से ही परिवहन करके नीमच में जल आपूर्ति की गई थी। ग्रेड 43 और 53 की पोर्टलैंड सीमेंट और पोजलाना पोर्टलैंड सीमेंट बनाने वाला यह कारखाना आज कुछ लोगों की उदासीनता और षड्यंत्र का शिकार हो गया है। नीमच की जनता को यह भी ज्ञात है कि 2017 में इस कारखाने की खेड़ा राठौर की जमीन को एक निजी कारखाने द्वारा हथियाने की साजिश को स्थानीय जागरुक पत्रकारों को खेड़ा राठौर लेजाकर उस साजिश का पर्दा फाश हमारे द्वारा कराया गया था और उसके खिलाफ शिकायत भी की गई। आशंका का यह भी है की दरअसल सीमेंट की क्षेत्र के कुछ निजी खिलाड़ी इस कारखाने को सरकारी क्षेत्र में नहीं चलने देना चाहते हैं ।उनकी गिद्ध दृष्टि इसकी खदानों पर लगी हुई है। एक आशंका यह भी है कि कुछ बड़े नेताओं के इशारे पर सीसीआई नयागांव की यह जमीन सागराना घाटी के पास डलने वाले नए सीमेंट प्लांट को भी औने-पौने दाम में दी जा सकती है। यह कंपनी  गुजरात की है।
 क्योंकि उक्त प्लांट के पास अभी तक शायद लाइमस्टोन की कोई खदान नहीं है।
यह कोई छुपी हुई बात नहीं है कि एशिया के सबसे शानदार लाइमस्टोन और सबसे अधिक गहराई तक पाए जाने वाले लाइमस्टोन की लगभग 3000 बीघा क्षेत्र की खदानें सीमेंट कॉरपोरेशन आफ इंडिया की इस फैक्ट्री के पास है और ऐसी संपत्ति पर सभी अन्य निजी कंपनियों की निगाहें भी हैं। लेकिन यहां यह बात भी गौर करने लायक है कि क्षेत्र के किसानों ने अपनी जमीन सरकार को सरकारी क्षेत्र में फैक्ट्री चलाने के लिए दी थी ना कि निजी उद्योगपतियों को औने-पौने  दामों में बेचने के लिए। यदि आकलन करें तो उक्त प्लांट और जमीन की कीमत आज के संदर्भ में लगभग 1500 करोड रुपए के आसपास है। चित्तौड़ से नीमच तक पूरा सीमेंट हब विकसित हुआ है और कई सीमेंट प्लांट सुचारू रूप से चल रहे हैं ऐसे में नयागांव नीमच मध्य प्रदेश के प्लांट को चलाने की अरुचि के पीछे क्या षड्यंत्र हो सकता है यह क्षेत्र की जनता को समझना होगा।
 हम नीमच मंदसौर क्षेत्र के माननीय सांसद और विधायक गणों से तथा क्षेत्र की तमाम संगठनों, जागरूक नागरिकों, छात्र, नौजवानों से अपील करते हैं कि इस कारखाने को सरकारी क्षेत्र में चालू करने हेतु गंभीर प्रयास करने की और बिना राजनीति के एकजुट होकर वैधानिक तरीके से संघर्ष चलाने की आवश्यकता है। नहीं तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।

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