नीमच। महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में दर्ज छात्रों को दोपहर का भोजन संबंधित समूह द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार प्रतिदिन प्रदाय किया जा रहा हैकिंतुसमय पर भोजन पकाने की लागत राशिएवं रसोईया का मानदेय जारी नहीं होने से समूह संचालक को बहुत आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है महिला स्वयं सहायता समूह संघ प्रदेश अध्यक्ष माया मनोर बैरागी द्वारा बताया गया की समय पर समूह को भोजन पकाने की लागत राशि काभुगतान प्रतिमाह हो जिस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम पूर्व में ज्ञापन भी दिया गया एवंमुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी ज्ञापन के माध्यम से अवगत करवाया गया किंतु माह जनवरी $फरवरी 2025 यानी की दो माह बित चुके मार्च तीसरा महीना चल रहा हैऐसे में संबंधित समूह संचालक कब तकउधर सामग्री लाकर कर्ज में डूबता जा रहा हैआखिर इन समूह की कामकाजी महिलाओं का समय पर भुगतान क्यों नहीं हो रहा है मै इन्हे किस गुनाह की सजा मिल रही है मध्य प्रदेश मेंएक तरफ लाडली बहनों को एक निश्चित तारीख पर सिंगल क्लिक से राशी जारी होती है इस तरह इन कामकाजी महिलाओं एवं कार्यरत रसोईया का भुगतान भी प्रतिमाह एक निश्चिततारीख को जारी हो एवं वह भीविद्यालय में दर्ज छात्र संख्या के मान से खाद्यन एवं राशी जारी हो ताकि योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से किया जा सके विलंब से राशि जारी होने पर समूह की गरीब महिलाएंअपना हिसाब किताब सही तरह से नहीं रख पाती है जिसके लिए विभाग द्वारा समूह से बेवजह की जानकारी मांग करऑडिट के नाम से परेशान किया जाता है क्योंकि समूह में महिलाएं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं होती है इन्हें ज्यादा कागजी कार्यों से भी दूर रखा जाए किचन सेड मे जब से मध्यान भोजन लागू हुआ था मध्यान भोजन पकाने के जो बर्तन थेऔर टूट फुट गए इसलिए शासन द्वारा नए बर्तनअतिशिघ्र उपलब्ध करवाया जाए आंगनबाड़ियों में स्थिति और ज्यादा खराब है केन्द्रो पर दर्ज संख्या के मान से समूह द्वारा सुबह का नास्ता एवं भोजन प्रदान किया जा रहा है किंतु इस मान से समूह संचालक को ना तो खाद्यान्न मिल रहा है ना राशि का भुगतान हो रहा हैऔर विभाग मेंकई बारओके समस्या के विषय में अवगत करवाया गया पर कोई सुनने वाला नहीं यहा तकी दुर दराज आंगनबाड़ी केन्द्रों पर परिवहन व्यय जो पहले मिलता था वह भी अब नही मिलता इन सारी समस्याओं की तरफ शासन का ध्यान आकर्षित होऔर इन समूह की कामकाजी महिलाओं को समय पर भुगतान होताकि योजना का संचालनकरने मैं आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े अन्यथा महिलाएं परेशान होकर अपने हक अधिकार की लड़ाई के लिएआंदोलन करने को मजबूर होगी जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।