चित्तौड़गढ़। शास्त्री नगर स्थित समता भवन में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए हेमन्त मुनि म.सा. ने कहा कि ज्ञान ध्यान तप स्वाध्याय नियम एवं संत सान्निध्य से शुभ भावों में रहते हैं, तथा अशुभ भावों से दूर होते हैं। शुभ भावों में रहने से जीवन शान्त व उन्नत बनते हुए अपने मोक्ष लक्ष्य की ओर गतिमान हो सकते हैं। बालको में स्वाध्याय पठन पाठन की रूचि बनी रहे। महापुरूषों के जीवन साहित्यों से प्रेरणा देते रहना चाहिए। सुसंस्कारित बालक परिवार समाज देश में शान्ति सद्भाव बढ़ाते हैं और सेवाभावी बनते हैं।
मुनि ने कहा मोक्ष का अर्थ है अपने किए हुए कर्मों से मुक्ति। भगवान महावीर ने अपने कर्मों को काटने के लिए संयम मार्ग चुना और साधना में रत रहे। संसार मार्ग को त्यागा, मोह को त्यागा। अनासक्त भाव में रहकर मौन साधना की। कष्ट सहे लेकिन समभावो में रहकर लक्ष्य मोक्ष प्राप्त किया।
हेमन्त मुनि ने कहा कि ज्ञान प्राप्त करके ज्ञानपूर्वक जीवन जीना महत्वपूर्ण है। भोजन में क्या आहार करना, क्यों आहार करना यह समझना चाहिए। शरीर निर्वाह के लिए आहार है। अच्छी आदतें हों। कब खाना, क्या खाना, कितना खाना, क्यों खाना, विचार करना चाहिए। मनुष्य जीवन का मौका मिला है। संयममय जीवन जीकर कर्मों को काटना है। कर्म छोड़ते नही है। कर्मों का भुगतान करना ही होता है चाहे वह कोई हो। प्राणी मात्र के प्रति दया करूणा भाव रहे। जीवन में अनावश्यक कार्यों में समय व्यतीत न करें। कर्म बंधन की स्थिति सदैव ध्यान में रहे। संसार के कार्य करना पड़ते हैं लेकिन आसक्त न बनें। उन्होंने कहा प्रदर्शन आडम्बर से दूर रहें। मरण से पहले मरण को मार देना है। धर्ममय जीवन से अंत समय में शान्ति रहती तथा जीवन में भी शान्ति रहती है। संथारा महत्वपूर्ण साधना है। धर्म आराधना से शान्ति मिलती है। संत दर्शन का महत्व बताते हुए गीत गाया ‘अहो अहो मेरे भगवान सुहाने दर्शन हो तो ऐसा लगता है कि रूह रूह में भर रहे संयम’, धर्मसभा भाव विभोर हो गयी। मेवाड़ की धरा पर भी अनेक महापुरूष हुए हैं। प्रेरणा लेनी है। जीवन सजाना है, आनन्द पाना है। समतामय जीवन जीना है तभी कल्याण होगा।
प्रवचन सभा को पूर्व में अनन्य मुनि ने संबोधित करते हुए कहा कि मन यदि संभल कर चलता है तो सही दिशा में कदत बढ़ते हैं। रात्रि भोजन त्याग, ब्रह्मचर्य का पालन का लक्ष्य रहना चाहिए। ये महत्वपूर्ण साधना है। रस परित्याग होने पर धार्मिक लाभ के साथ साथ स्वास्थ्य लाभ भी बहुत है। जिनवाणी से, आगमों से, साधु संतों से, श्रावक श्राविकाओं से मोक्ष मार्ग की जानकारी होती है। मोक्ष की चाह के लिए मोक्ष की राह पर चलना होगा। सभा के अंत में प्रत्याख्यान हुए। हेमन्त मुनि ने मंगल पाठ सुनाया।
धर्मसभा में महासती प्रेमलता म.सा., पुष्पलता म.सा., सिद्धप्रभा म.सा., जिनप्रभा म.सा. भी विराजित थे। धर्मसभा में हेमन्त मुनि के सांसारिक पिता लाभचंद पोखरना एवं परिवारजन बेगूं से दर्शनार्थ उपस्थित रहे। संचालन संघ अध्यक्ष रोशनलाल लोढ़ा ने किया।