नीमच। होली का डंडा गाड़ने की परंपरा भक्त पहलाद और होलिका की गाथा से जुड़ी है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है होली से पहले होली के डांडे गाड़े जाते हैं जिसमें एक होली का और दूसरा पहलाद का प्रतीक होता है होलिका दहन के समय प्रहलाद के प्रतीक डांडे को बचाया जाता है इसी परंपरागत को बरकरार रखते हुए प्रतिवर्ष अनुसार नया बाजार भाजू चौराहे पर विधि विधान व पूजा अर्चना के साथ समाजसेवियो एवं व्यवसासीगणो ओर रहवासीगणो द्वारा भौजू चौराहे पर होली का डंडा गड़ा गया साथ ही सभी साथियों से धुलेंडी के दिन शहर के मुख्य क्षेत्रों से निकलने वाली गैर में भी सम्मिलित होने का आग्रह किया।
इस अवसर पर समाजसेवी रमेश जायसवाल,अशोक शर्मा,देवाराम परमार, रवि राव, दिनेश जैन, चंद्रप्रकाश (मोमु) लालवानी, केवल साहु, प्रवीण बटवाल, संजय चौरसिया, डालूराम, जगदीश परमार, विशाल घेंघट, अभिषेक पगारिया, मुकेश चौहान, अक्कू राठौर,राजू अग्रवाल, पप्पू नरेला, आतिश गोड़, अशोक जौहरी, अथर्व नरेला,समीर सौंपकर, प्रमोद कौशल आदि उपस्थित रहे।