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March 13, 2025, 4:58 pm
NEWS : राजस्थान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध, होलिका दहन पर परंपराओं का रंगीन संगम, पढ़े संजय खाबिया की खबर

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चित्तौड़गढ़। रंगों के महापर्व होली से एक दिन पहले मनाए जाने वाले होलिका दहन का आज पूरे राजस्थान में पारंपरिक और भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त रात 11.29 बजे से 12.06 बजे तक निर्धारित है। राजस्थान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, और यहां होलिका दहन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक एकता, भक्ति और परंपराओं का जीवंत संगम भी है।

शाही होलिका दहनरू मेवाड़ का भव्य आयोजन-
राजस्थान के उदयपुर में मेवाड़ राजघराने द्वारा शाही होलिका दहन की सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है। यह उत्सव सिटी पैलेस के मानक चौक में होता है, जहां मेवाड़ राजवंश के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते हैं। रथ यात्रा, संगीत, नृत्य और विशेष पूजा अनुष्ठान इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होते हैं।

बांसवाड़ा की अनूठी होलीरू अंगारों पर चलने की परंपरा-
बांसवाड़ा जिले के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में होलिका दहन के बाद अंगारों पर चलने की परंपरा निभाई जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह परंपरा बुरी शक्तियों को दूर भगाने और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। यहां के लोग अग्नि को साक्षी मानकर अपने संकल्प को सिद्ध करने का प्रयास करते हैं।

भीलवाड़ा का हरणी गांवरू जहां जलती नहीं, पूजी जाती है होली-
भीलवाड़ा जिले का हरणी गांव एक अनोखी परंपरा का साक्षी है, जहां पिछले 70 वर्षों से लकड़ी की होली जलाने के बजाय चांदी से बनी प्रतीकात्मक होली की पूजा की जाती है। यह परंपरा एक पुराने संकल्प से जुड़ी है, जिसमें गांववालों ने किसी दुर्घटना के बाद यह प्रण लिया था कि वे प्रकृति के संरक्षण के लिए लकड़ी की होली नहीं जलाएंगे।

बीकानेर और जोधपुर की रंगीन होली-
बीकानेर और जोधपुर में होली का त्योहार अपने भव्य रंग उत्सव के लिए प्रसिद्ध है। यहां होलिका दहन के बाद पारंपरिक लोकगीतों और नृत्यों का आयोजन होता है। बीकानेर में होली खेलने के लिए गेर नृत्य की विशेष परंपरा है, जिसमें पुरुष पारंपरिक परिधानों में ढोल की थाप पर नृत्य करते हैं।

होलिका दहन का धार्मिक महत्व और पूजा विधि-
होलिका दहन के दिन भक्तजन लकड़ियों, कंडों, नारियल, गेहूं की बालियां और विभिन्न पवित्र सामग्री से अग्नि प्रज्वलित करते हैं। मान्यता है कि इस अग्नि की परिक्रमा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

संस्कृति और परंपरा का उत्सव
राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में होलिका दहन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं का प्रतीक है। यहां की हर होली की एक अनोखी कहानी होती है, जो राजस्थान की समृद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए रखती है। इस वर्ष भी होलिका दहन पूरे राज्य में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा, जिसमें परंपराओं की महक और संस्कृति की गरिमा देखने को मिलेगी।

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