मनासा। जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को नहीं लेते हैं गंभीरता से। ऐसा ही एक मामला मनासा में देखने को मिला है। शिकायतकर्ता मनोज पिता कैलाश चंद कुशवाह निवासी मनासा ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत नंबर 31016152 व 31281063 दर्ज कर रखी हैं, जिस पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी विनोद नागोरे द्वारा किस तरह से दुकानदार के पक्ष रखते हुए जवाब दिया गया है शिकायत कर्ता से सिगरेट पॉकेट खरीदने का बिल मांग लिया, सिगरेट के पैकेट के ज्यादा रुपए लेने की की थी। शिकायत इस आधार पे शिकायत बंद करवा दी। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी यह तो बताओ मनासा में कितने ऐसी मामलों में आप ने जांच की और बिल देखा हो ऐसे अधिकारी के ऊपर उच्च अधिकारी भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं और ऐसे अधिकारी को बचाने का संपूर्ण रूप से प्रयास करते हैं। वहीं शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी आरएन दिवाकर एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी विनोद नागौर के ऊपर यह भी आरोप लगाया है कि मेरे ऊपर शिकायत उठाने हेतु दबाव बनाया रहा है। किस तरह से उक्त दोनों अधिकारी शिकायतकर्ता को धमकाते हुए शिकायत वापस लेने हेतु अनर्गल दबाव भी बनाते हैं।
जानकारी के अनुसार तो यहां तक भी कहा जाता है कि जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी आरएन दिवाकर 3 साल से अधिक समय से नीमच जिले में जमे हुए हैं व कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी विनोद नागोरे का ट्रांसफर जब भी होता है तो ये जुगाड़ कर एक माह के भीतर ही पुनः वापस मनासा लौट आते हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितना जमकर यह इस क्षेत्र में वसूली का मांझा सूत रहे हैं।
वहीं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी मनासा ने अपने कार्य को संचालित करने के लिये एक निजी सहायक भी रख लिया है जो कि एक प्राइवेट युवक है क्या कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी इतने व्यस्त हो कि आपका कार्य एक प्राइवेट युवक करे ओर उसकी कोई जवाबदारी भी किसी कार्य को लेकर ना हो तो आप कैसे उसको अपने अधिकार दे सकते हो यह भी जांच का विषय है।
जहां एक ओर शाशन के साफ तौर पर निर्देश है कि जो जहां कार्यरत है वहीं मुख्यालय पर निवास करना अनिवार्य है ऐसे में यह कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी विनोद नागोरे साहब तो काम होते ही पुनः मंदसौर अपने निवास की ओर लौट जाते हैं। जब इनकी शिकायत की जाती है तो जिम्मेदार अधिकारी भी फोन नहीं उठाते हैं। वहीं अब कार्रवाई तो बहुत दूर की बात रह गई?
वहीं एक मामला बुधवार 12/03/2025 को पीडीएस के चावल को लेकर हुआ। समय पर किसी भी संबंधित अधिकारी ने फोन तक नहीं उठाया। इससे यही प्रतीत होता है कि पीडीएफ चावलों की कालाबाजारी करने वालों से मोटी रकम बंदी में लेते हैं।