भौरासा। हिन्दी पंचांग के अनुसार होली के सातवें दिन माता शीतला को भोजन के माध्यम से याद किया जाता है उन्हें ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है रंग पंचमी के दो दिन बाद शीतला सतमी आती है।जहा शीतला माता की पूजा की जाती है। उनकी कृपा से निरोगी जीवन का आशीष प्राप्त होता है।शीतला माता को हमेशा बासी भोजन का ही भोग लगाया जाता है शीतला सप्तमी की पूजा के बाद चालीसा पढ़ी जाती है.इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है और एक दिन पहले बने ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है जिसे प्रसाद के रूप में सभी लोग ग्रहण करते है। पंडित मनोज जोशी के अनुसार शरीर को रोग मुक्त करने के लिए शीतला माता का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि शीतला माता के पूजन से चेचक जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है। इसमें महिलाएं सुर्याेदय से पहले उठकर शीतला माता मंदिरों में जाकर पूजा करती है। पूजा के बाद स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है। इसके अलावा शीतला माता की कथा भी सुनी जाती है। इस दिन महिलाएं माता का व्रत भी रखती है। ऐसी मान्यता है। कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने वाले की मनोकामना पूरी होती है।