चित्तौड़गढ़। सेवा केंद्र प्रताप नगर पर त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति जानकी दादी जी की पांचवीं पुण्यतिथि मनाई गई। आशा दीदी ने बताया कि दादी जी सत्यता, स्वच्छता, सरलता, धैर्यता जैसे अनेक गुणों की प्रतिमूर्ति थी। अपना संपूर्ण जीवन विश्व कल्याण के लिए आत्माओं की सेवा के लिए समर्पित करने वाली महान तपस्वी विशेष व्यक्तित्व की धनी दादी जी का जन्म 1916 में अखंड भारत के सिंध हैदराबाद में एक आध्यात्मिक संपन्न परिवार में हुआ था और दादी जी अपने 21 वर्ष की आयु में ही इस प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संपर्क में आई। संपूर्ण विश्व में एक आध्यात्मिक क्रांति लाने वाली दादी जानकी जी पूर्व मुख्य प्रशासिका 104 वर्ष की आयु संपन्न करते हुए दादी जी ने संपूर्ण विश्व को मातृत्व के रूप में प्रेरणा दी। माउंट आबू पांडव भवन से उपस्थित राज योगी ब्रह्मा कुमार गोविंद भाई, राजू भाई, कमलेश भाई, डॉक्टर ऑर्थाेपेडिक कैलाश भाई एयर टिकट ऑफिस से दत्ता भाई, प्रदीप भाई आदि उपस्थित थे। बालकिशन भाई, सुभाष भाई मनोज भाई, गौरी शंकर भाई व सभी बीके भाई बहनों ने दादी जी को पुष्पांजलि अर्पित की उसके पश्चात सभी को भोग प्रसाद बांटा गया।