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March 29, 2025, 3:03 pm
KHABAR : शनि अमावस्या पर शनिवार को जिले के ऐंती पर्वत स्थित शनि मंदिर पर विशाल मेला, भगवान शनि के दरबार में पहुंचे लाखों श्रद्धालु, तेलाभिषेक कर मांगी मन्नत, पढे़ खबर 

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मुरैना। शनि अमावस्या पर शनिवार को जिले के ऐंती पर्वत स्थित शनि मंदिर पर विशाल मेला लगा। न्याय के देवता शनि के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा कई जनप्रतिनिधि, अधिकाीरियों और न्यायालयों के न्यायाधीश भी भगवान शनि के दर्शन को पहुंचे।  


आमवस्या के कारण मंदिर के पट शुक्रवार रात 12 बजे से ही खोल दिए गए, इसीलिए आधी रात से ही दर्शनार्थियो की कतारें लग गईं। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक लाइट से सजाया गया। फर्श पर कारपेट बिछाया गया। रात में विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुरैना के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा शनिवार की दोपहर में पहुंचे, उन्होंने भगवान शनि का तेलाभिषेक किया। परंपरा के अनुसार, बहुत सारे श्रद्धालुओं ने मुंडन कराया। पुराने कपड़े व जूते-चप्पल यही त्याग दिए। परिसर में बाल, कपड़े व जूते-चप्पलों का इतना ढेर लग गया कि बानमोर नगर परिषद की कई गाड़ियों से भरकर फेंकना पड़ा। कलेक्टर अंकित अस्थान के द्वारा श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं को देखते हुए प्रशासन के द्वारा सारी तैयारियां की गई है। जिस किसी भी श्रद्धालुओं के आवागमन में कोई असुविधा ना हो, अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुरैना कलेक्टर के द्वारा रेलवे विभाग से दो स्पेशल ट्रेन चलाने की भी सिफारिश की गई है।शनि मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों से लेकर मेला परिसर में भक्तों के लिए जगह-जगह भंडारे, ठंडे पानी के स्टाल लगे। वहीं शनि मेले के दौरान ड्यूटी पर लगे एक पुलिसकर्मी ने अपाहिज व्यक्ति को गोद में उठाकर शनि देव की प्रतिमा के दर्शन कराए जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।


देश के कई प्रांतों से आए श्रद्धालु
शनि मेले में ग्वालियर-चंबल या मप्र ही नहीं बल्कि राजस्थान, उप्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात आदि प्रांतों से श्रद्धालु पहुंचे। राजस्थान के अजमेर से आए रामदेव ने कहा, कि भगवान शनि के दर्शनों के लिए आए हैं। अपने परिवार और पूरे क्षेत्र की सुख शांति की कामना के लिए शनिदेव से अर्ज लगाएंगे। फतेहबाद से आए युवा श्रद्धालु ने कहा, कि मुझे परेशानी है, मैं भगवान से प्रार्थना करने आया हूं, कि मेरे दुख-दर्दों को खत्म करें। लोग बताते हैं यहां मुंडन कराने और शनिदेव के दर्शनों से दुख दर्द खत्म हो जाते हैं। 


शनि मंदिर के संत शिवराम दास त्यागी ने कहा, कि यह विश्व की सबसे प्राचीन प्रतिमा मानी जाती है। त्रेतायुग में शनि भगवान यहां पर्वत के रूप में विराजमान हुए। शनि महाराज यहां तांत्रिक रूप में विराज रहे हैं। इनका क्रोध शांत कराने के लिए शिवजी ने आधा चंद्रमा दिया, इन्हें वैराग्य धारण करवाया गया, नाथ संप्रदाय का मंत्र दिया। शनि पर्वत की कंदरा में बैठकर शनि देव ने घोर तपस्या की, यहीं वह श्रापग्रस्त हुए, जब शनिदेव की धर्मपत्नी धामिनी ने श्राप दिया कि, तुम जिसकी तरफ नेत्र उठाकर देखोगे वह भस्म हो जाएगा। उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, इस रहस्य को रावण भी जानता था, इसीलिए रावण ने जब इनको लंका में कैद करके रखा था, तब इनको उल्टा करके रखा था। शनि अमावस्या पर शनिदेव क्रोध मुक्त रहते हैं, वह सबकी सुनते हैं, सबके अपराध क्षमा करते हैं। आज प्रेत अमावस्या है, आज पूर्वजों के प्रति जो किया जाता है वह भगवान शनि के द्वारा पूर्वजों को दिया जाता है। शनि मंदिर की प्रतिमा को आर्केलाजी विभाग ईसा पूर्व भी 800 साल पहले की बताता है। भगवत पुराण के अनुसार यह प्रतिमा उल्का पिंड से निर्मित है, महाराज दशरथ इसे शनिलोक से लेकर आए थे। शनि अमावस्या पर यहां देश के हर प्रांत से लाखों श्रद्धालु आते हैं। तीस साल बाद शनि भगवान मीन राशि में जा रहे हैं। मीन राशि से आगे की दो और दो पीछे की राशियों में इनका प्रभाव रहेगा। शनि एक साथ पांच राशियों में चलता है। शनिदेव बहुत अच्छे देवता है, क्रूर हैं, पर बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। जरा से मंत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। इनकी पूजा के लिए घर से तेल, आटे का दीपक व पूजा के लिए सामग्री लाएं।

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