छतरपुर। जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर 900 साल पुराना मंदिर है माता बम्बरबैनी मंदिर जो पहाड़ को चीरकर प्रगट हुई थी आज भी पहाड़ चिरा हुआ दिखाई देता है और माता लेती हुयी दिखती है मंदिर का पुराना इस मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जोड़ा जाता है पुराने लोगो एवम इतिहास बताता है कि जब भगवान राम ने माता सीता का परित्याग कर दिया था तब सीता माता यही पर रुकी थी नीचे महर्षि बाल्मीक का आश्रम भी है महर्षि बाल्मीक ने माता सीता को बन देवी का नाम दिया था जिसके बाद इनका नाम बम्बरबैनी पड़ गया लोग बम्बरबैनी माता को सीता का रूप मानते है यही कारण है यहाँ बंदरो की भरमार है। प्रसिद्ध इतिहासकार काशी प्रसाद त्रिपाठी ने अपनी पुस्तक में उल्लेख किया 1775 ईसवी में पन्ना महाराज को इस मंदिर का रहस्य स्वप्न में माता ने खुद बताया था तभी उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया था। ऐसी मान्यता है जो भी इस मंदिर में आता है और सच्चे मन से प्राथना करता है उसकी मनोकामना पूरी होती है।