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May 19, 2025, 5:34 pm
BIG NEWS : नीमच जिले में गरमाया अधिकारियों की सांठ-गांठ से अवैधानिक रूप से किए गए भूमि के नामांतरण का मामला, फरियादी रूबेंद्र व जसवंत सिंह ने की सीएम हेल्प लाइन सहित यहां शिकायत, तहसीलदार पर लगाए आरोप, पढ़े खबर 

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नीमच। जिले के जवासा में स्थित एक भूमि का अवैधानिक रूप से नामांतरण किया गया है। इस नामांतरण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस अवैधानिक नामांतरण की शिकायत प्रार्थी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों सहित सीएम हेल्प लाइन व अन्य कार्यालयों में की गई। बावजूद अब तक शिकायत का कोई निराकरण नहीं हुआ। प्रार्थी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सांठगांठ कर उमराव सिंह द्वारा उपरोक्त वर्णित भूमि का नामांतरण करने का आरोप भी लगाया है। प्रार्थी ने बताया कि जिस भूमि का अपीलीय न्यायालय द्वारा नामांतरण नहीं किया उक्त भूमि का तहसीलदार द्वारा पूनः आवेदन आने पर आवेदक के पक्ष में निराकरण कर दिया। ऐसा कर तहसीलदार द्वारा गंभीर वैधानिक भूल की गई है या फिर आवेदनकर्ता से मिलिभगत कर प्रकरण का निराकरण आवेदक के पक्ष में विधि के विरूद्ध जाकर मिलिभगत कर किया गया है। 

प्रार्थीगण रूबेन्द्र सिंह पिता मदनसिंह एवं जसवंत सिंह सोलंकी पिता मदनसिंह सोलंकी निवासी जवासा तहसील व जिला नीमच ने बताया कि वर्ष 2005 में वसीयत के माध्यम से वसीयतकर्ता सरदारसिंह पिता गमेर सिंह उर्फ गम्भीरसिंह राजपूत द्वारा मौजा ग्राम जवासा तहसील व जिला नीमच स्थित भूमि सर्वे नम्बर 598 रकबा 0.52 हें में से 1/2 भाग याने रकबा 0.26 हे. का पश्चिमी भाग तथा भूमि सर्वे नम्बर 585 रकबा 0.05 हे. पर कुंआ प्रार्थी जसवंतसिंह सोलंकी को प्रदान किया था एवं ग्राम जवासा तहसील व जिला नीमच में स्थित सर्वे नम्बर 580 रकबा 0.280 हे. प्राथी रूबेन्द्रसिंह को वसीयत के माध्यम से प्रदान किया था। उक्त संपादित वसीयत में वसीयतकर्ता स्व सरदारसिंह कि पत्नी मौर कुंवर द्वारा भी अपनी सहमती प्रदान की थी । 


02. यह कि वसीयत संपादित होने के पूर्व से ही प्रार्थीगण एवं उसके पिता लगभग 40-50 वर्षों से उक्त भूमि पर काबिज भी थे। वसीयतकर्ता वसीयत के संपादन के 40 वर्ष पूर्व लगभग ग्राम जवासा छोड़कर चले गये थे एवं वसीयत्तग्रहीता के पिता से उक्त भूमि के एवज में पारिवारिक समझौते अनुसार भूमि कि तत्कालीन कीमत प्राप्त कर भूमि छोड़कर एवं उक्त भूमि का कब्जा प्रदान कर चले गये थे । वर्ष 2005 में जब उक्त भूमि के संबंध में प्रार्थीगणों के पिता एवं वसीयतकर्ता के मध्य बातचीत हुई एवं उक्त भूमि को कैसे वसीयतग्रहीता एवं उसके भाई के नाम पर शासकीय रिकार्ड में दर्ज करवाया जाए जो वसीयतकर्ता द्वारा प्रार्थीगणों के पक्ष में आपसी पारिवारिक सहमती से वसीयत संपादित करवाई एवं उसे नोटरी करवाई । 


03. यह कि प्रार्थीगण वसीयत संपादित होने के पूर्व से ही उक्त भूमि पर पारिवारिक समझौते अनुसार काबिज हैं एवं वैध वसीयतनामें के आधार पर उक्त भूमि के स्वामी भी हैं। प्रार्थीगणों द्वारा उपरोक्त वर्णित भूमि का नामांतरण शासकीय दस्तावेजों में अपने नाम नामांतरण करवाने हेतु प्रकरण अतिरिक्त तहसीलदार नीमच के समक्ष प्रस्तुत किया तो वह प्रकरण क्रमांक 254/1-6/2023-24 पर दर्ज हुआ एवं उक्त प्रकरण में आपत्ती प्राप्त होने पर तहसील न्यायालय द्वारा यह अभिमत दिया कि प्रकरण में वसीयत पर आपत्ति प्राप्त हुई है एवं ऐसी स्थिती में इस न्यायालय द्वारा सुनवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर होने से सुनवाई नहीं की जा सकती है एवं प्रकरण को निरस्त कर दिया गया। यह कि उक्त आदेश के विरूद्ध प्रार्थीगणों द्वारा माननीय न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी, उपखण्ड नीमच के समक्ष अपील प्रस्तुत की जिसका प्रकरण क्रमांक 246 / अपील / 2023 2023-24 होकर दिनांक 20/05/2025 को निराकरण किया गया एवं अनुविभागीय अधिकारी, उपखण्ड नीमच द्वारा भी अपने आदेश में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि वसीयत नामांतरण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा पारित निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि जब वसीयत वर आपत्ति हो तो उसपर निर्णय करने का अधिकारिता राजस्व न्यायालय को नहीं है एवं अपील को निरस्त कर दिया गया । 


04. यह कि प्रार्थीगणों द्वारा राजस्व न्यायालय निर्णयों के आधार पर सिविल न्यायालय में कार्यवाही करने ही वाले थे कि उमरावसिंह पिता सरदारसिंह निवासी छतरपुर झालावाड़ राजस्थान कि ओर से एक आवेदन पत्र न्यायालय अपर तहसीलदार तहसील व जिला नीमच के समक्ष प्रस्तुत किया जो प्रकरण क्रमांक 670/अ-6/24-25 पर दर्ज हुआ एवं उक्त आवेदन पर प्रार्थीगणों द्वारा आपत्ति भी प्रस्तुत की परन्तु राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सांठगांठ कर उमरावसिंह द्वारा उपरोक्त वर्णित भूमि का नामांतरण अपने नाम से करवाने का आदेश पारित करवा लिया जिसके विरूद्ध मेरे व्यवहारी द्वारा विधिक कार्यवाही की जा रही है। 


05. यह कि पूर्व में अतिरिक्त तहसीलदार नीमच के समक्ष प्रस्तुत किया तो वह प्रकरण क्रमांक 254/1-6/2023-24 पर दर्ज हुआ एवं उक्त प्रकरण में आपत्ती प्राप्त होने पर तहसील न्यायालय द्वारा यह अभिमत दिया कि प्रकरण में वसीयत पर आपत्ति प्राप्त हुई है एवं ऐसी स्थिती में इस न्यायालय द्वारा सुनवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर होने से सुनवाई नहीं की जा सकती है एवं प्रकरण को निरस्त कर दिया गया । इसके अतिरिक्त माननीय न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी, उपखण्ड नीमच के समक्ष अपील प्रस्तुत की जिसका प्रकरण क्रमांक 246 / अपील/2023-24 होकर दिनांक 20/05/2025 को निराकरण किया गया एवं अनुविभागीय अधिकारी, उपखण्ड नीमच द्वारा भी वसीयत पर आपत्ति आने पर प्रकरण को निरस्त कर दिया ओर यह अभिमत दिया कि उक्त मामले का निराकरण सिविल न्यायालय द्वारा ही किया जा सकता है। बावजूद इसके उमरावसिंह पिता सरदारसिंह निवासी छतरपुर झालावाड़ राजस्थान कि ओर से एक आवेदन पत्र न्यायालय अपर तहसीलदार तहसील व जिला नीमच के समक्ष प्रस्तुत किया जो प्रकरण क्रमांक 670/3-6/24-25 पर दर्ज हुआ एवं उक्त आवेदन पर प्रार्थीगणों द्वारा आपत्ति भी प्रस्तुत की परन्तु राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सांठगांठ कर उमरावसिंह द्वारा उपरोक्त वर्णित भूमि का नामांतरण कर दिया। जिस भूमि का अपीलीय न्यायालय द्वारा नामांतरण नहीं किया उक्त भूमि का तहसीलदार द्वारा पूनः आवेदन आने पर आवेदक के पक्ष में निराकरण कर दिया ऐसा कर तहसीलदार द्वारा गंभीर वैधानिक भूल की गई है या फिर आवेदनकर्ता से मिलिभगत कर प्रकरण का निराकरण आवेदक के पक्ष में विधि के विरूद्ध जाकर मिलिभगत कर कर दिया है। उक्त प्रकरण कि शिकायत प्रार्थी लोकायुक्त एवं आर्थिक अपराध शाखा में एवं मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन को भं पृथक से कर रहा है। उक्त प्रकरण का निराकरण का अधिकार सिविल न्यायालय को है बावजूद इसके प्रकरण में नामांतरण का आवेदन स्वीकार किया गया जिससे प्रार्थीगणों को अपूर्णीय क्षति हुई है एवं प्रार्थीगण इसके विरूद्ध उचित कार्यवाही कर रहे हैं। तक तक के लिये तहसीलदार के आदेश पर रोक लगाया जाना न्यायोचित है । 


अतः आवेदन पत्र प्रस्तुत कर निवेदन है कि प्रार्थीगणों के स्वामित्व एवं आधिपत्य कि भूमि का अवैधानिक रूप से नामांतरण करने पर तहसीलदार नीमच जिनके द्वारा निर्णय पारित किया गया है वैधानिक उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने कि कृपा करें एवं उक्त नामांतरण आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने कि कृपा करें। 

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