चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रताप नगर सेवा केंद्र पर शिक्षक दिवस मनाया गया। सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि मनुष्य द्वारा सिखाई गई शिक्षा समृद्ध जीवन दे सकती है। लेकिन परमात्मा द्वारा सिखाई गई शिक्षा जो सभी शिक्षकों के सर्वाेत्तम शिक्षक है समृद्ध जीवन के साथ-साथ सबको खुशहाल जीवन भी देती है। इसीलिए आनंद में जीवन और मन को शांति जैसे उपहार पाने के लिए परमात्मा के हम सभी आज्ञाकारी छात्र बने।
उन्होंने शिक्षा देते हुए कहा कि मानव जीवन को ही मिट्टी कहा जाता है जो मिट्टी में मिल जाता है इस तरह मानव के द्वारा बनाई गई निर्मित वस्तु भी विनाशी है। उन्होंने बताया कि आज मोबाइल में अच्छे-अच्छे बातें दुनिया के सामने लाई तो बुरी बातें भी लाई आज विश्व में डिजिटल क्रांति की मोबाइल एक बहुत अच्छी भूमिका निभा रहा है। आप सभी ने सुना कि गांधी जी के तीन बंदर थे बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत बोलो और अभी चौथा बंदर कहता है कि वह कुछ देखा देख नहीं कुछ सुनता नहीं कुछ बात नहीं करता क्योंकि अब उसके हाथ में मोबाइल है। आज वास्तविक वास्तविकता देखी जाए तो मोबाइल जो कह रहा है वह हम कर रहे हैं सब काम छोड़कर पहले चार्ज करो कॉल आया तुरंत उठाओ मेल लाया मैसेज आया चेक करो।
उन्होंने बताया कि मन ही एक मात्र कारण है मनुष्य के बंधन या फ्रीडम का आज देखा जाए तो मान हमारा बंधन में है कोई भी हमें कंट्रोल नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि मोबाइल मन और मेडिटेशन अब हमारे मन को कौन चला रहा है मोबाइल या मन तीनों का संतुलन होना बहुत जरूरी है। इसी वजह से हम अपने मन को एकाग्र नहीं कर पाते और हम अपने काम का फोकस नहीं कर पाए। उन्होंने बताया कि हम अपने मन को मालिक बनकर चलाएं उसे सही दिशा दे। मेडिटेशन के द्वारा ही हम अपने मन को और मोबाइल को बिना रुकावट के चला सकते हैं। बिना शिक्षा के मनुष्य का जीवन किसी काम का नहीं है। क्लास में उपस्थित सभी भाई बहनों ने दीदी जी को सम्मानित करते हुए माला अर्पित की और उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी, इसके पश्चात सभी को प्रसाद बांटा गया।