चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारीज प्रताप नगर की संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी जी ने पुरोहितों का सावता और सिसोदिया का सावता गांव में ईश्वरीय संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी आत्माएं परमात्मा की संतान है परमात्मा शांति प्रेम का सागर है हम आत्माएं भी शांति प्रेम सुख स्वरूप है। उन्होंने बताया आत्मा और प्रकृति के पांचो तत्व का आपस में बहुत मेल है आत्मा प्रकृति की आकर्षक से मुक्त होती है प्रकृति का आकर्षण ही आत्मा को स्वतंत्रता से परतंत्र बनती है। वर्तमान समय निराकार परमपिता परमात्मा शिव धारा पर पुनः अवतरित होकर आत्मा की परतंत्रता का कारण बताते हैं कि हम सभी आत्माएं विषय विकारों में फंसकर अपने आप को भूलकर परमात्मा को भूलकर दुखों में फंस गई है।
उन्होंने बताया कि सृष्टि के आरंभ काल में , देवी देवताएं प्रकृति के सर्वे आकर्षणों से मुक्त थी यह भौतिक शरीर साधन मात्र है बल्कि वास्तव में हम सभी आत्माएं है और हमारा निजी स्वरूप शांति प्रेम दया करुणा है। उन्होंने बताया की इंद्रियां मन को गुलाम बना देती है इंद्रियों को संयम और नियम से जीता जा सकता है। इसलिए जितना अपनी दृष्टि मुख और कानों पर संयम रखेंगे उतना ही सुरक्षित रहेंगे जितना मुख पर संयम होगा उतना ही हम सुरक्षित रहेंगे। बुद्धि जितनी स्वच्छ और स्वस्थ होगी उतनी व्यक्ति वस्तु पदार्थ के प्रभाव से मालिन नहीं होगी। बुद्धि की परख यथार्थ है तो जीवन में दुर्घटना से बचाव होता है जैसे गाड़ी चालक शांत एकाग्र और स्थिर है तो दुर्घटना से बचाव होता है इसलिए जितनी पवित्र बुद्धि होगी उतना मन के विचारों को सही दिशा दे सकेंगे। गुजरात से पधारे महर्षि भाई सहजानंद भाई राय जी भाई जो कि किसानों को मार्गदर्शन देते हैं किसानों को सशक्त बनाने के लिए एकता लाने और व्यसन से मुक्त बनाने के लिए जोर दिया गया। बालकिशन भाई ने अपना अनुभव सुनाया कैसे परमात्मा की याद से हमारा मन सशक्त होता है और हमारा मनोबल शक्तिशाली बनता है। अपने अंदर ही हर प्रकार की तरंग है जो हर प्रकार कार्य करती है इसका अभ्यास कराया गया।