मनासा। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सोयाबीन फसल के लिए भावांतर योजना शुरू कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया है। हालांकि किसानों का कहना है कि जब फसल ही पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, तो भावांतर योजना का कोई लाभ नहीं है। ऐसे हालात में किसानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक राहत देने के बजाय केवल “झुनझुना पकड़ाने” का कार्य कर रही है। जिले सहित प्रदेश के कई गांवों से किसान लगातार ज्ञापन देकर सरकार को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि भावांतर की बजाय सरकार को तुरंत फसल नुकसानी का मुआवजा घोषित करना चाहिए।