चित्तौड़गढ़। धनेत कलां गांव के दाता चौराहा परिसर में माताजी की पंडोली के कलाकारों ने पारंपरिक गवरी का भव्य मंचन किया। गवरी देखने के लिए आसपास के गांवों मिश्रो की पीपली, धनेत खुर्द, डगला का खेड़ा, बोदियायाना और गणेशपुरा से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और रूप-सज्जा के साथ मंचन स्थल पर पहुंचे तो ‘जय मां गवरी’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
मंचन के दौरान राई बुढ़िया और राई माता ने पारंपरिक चाल एवं छड़ी संचालन के साथ प्रस्तुति को आगे बढ़ाया। फत्ता जी-फत्तूड़ी और भोलिया भूत के प्रसंगों में हास्य-व्यंग्य के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया गया। वहीं कालू कीर-कान गुजरी, बंजारा-बंजारी और मीणा-गुजरी के प्रसंगों के जरिए कलाकारों ने सामाजिक एवं पौराणिक कथाओं को जीवंत किया।
दानव-देव युद्ध के प्रसंग में शिव-पार्वती की गाथा और असुरों के वध का प्रभावी मंचन किया गया। मांदल और कांसे की थाली की थाप पर कलाकारों ने घेरे में सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। मंचन देखने के लिए बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामवासियों एवं आयोजन समिति की ओर से सभी कलाकारों का फूल-मालाओं और साफा पहनाकर स्वागत किया गया। आयोजकों ने कलाकारों की लोक कला एवं लोक परंपरा को जीवंत रखने में उनके योगदान की सराहना की।