चित्तौड़गढ़। ब्रह्मा कुमारीज प्रताप नगर सेवा केंद्र पर राज योगिनी आशा दीदी ने बताया कि नवदुर्गा का हर रूप पूजनीय है। उन्होंने बताया कि जब कलयुग का अथवा ब्रह्मा की रात्रि का अंत होता है तब सभी आत्माएं आसुरी गुनाह से पीड़ित और अज्ञान निद्रा में सोई हुई होती है और आत्मिक शक्ति से कमजोर होती है। ऐसे अज्ञान रात्रि के समय परमपिता परमात्मा ज्योति स्वरूप शिवा धरा पर अवतरित होकर नर नारियों को ज्ञान सुना कर उनका जीवन परिवर्तन कर उन्हें आध्यात्मिक जन्म देते हैं।
उन्होंने कहा कि अभी नवरात्रों में भक्त जन शक्तियों के चित्रों की अथवा मूर्तियों के सामने दीप जगा कर कहते हैं, हे अंबे जैसे यह दीपक चारों और प्रकाशित हो रहा है आप भी हमारे जीवन में प्रकाश भर दो। हमारा ज्ञान अंधकार हर लो हमें शक्ति दो आज लोग शक्तियों की भक्ति करते हैं परंतु उनकी तरह शक्ति की प्राप्ति नहीं करते हैं। वह नवरात्रि के दिनों में मिट्टी का दीपक जगाते हैं परंतु उसे सदा जागती जोत परमात्मा शिव से जिसने की शक्तियों को शक्ति दी योग लगाकर स्वयं आत्मा की शक्ति जोत नहीं जगाते वे शक्तियों को ही तपस्विनी ब्रह्मचारिणी इत्यादि मानते हैं।
उन्होंने बताया कि हमें परमात्मा शिव से योग लगाकर अष्ट शक्तियां हमें अपने जीवन में धारण करनी हैं। शक्ति से अभिप्राय आध्यात्मिक शक्ति ज्ञान योग तथा पवित्रता से प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इन सभी देवियों ने शिव से योग लगाकर इतनी शक्ति धरण की उनके सामने जो भी आसुरी शक्तियां कभी भी टिक नहीं पाई और उनका संहार किया गया। उन्होंने बताया कि सप्तमी अष्टमी नवमी तीन दिन हम सभी अपना चैतन्य रूप धारण कर अष्ट शक्तियों का स्वयं में आह्वान करेंगे और स्वयं को शक्तिशाली बनाकर हमारे अंदर छुपे अवगुण का नाश अवश्य करेंगे और सच्ची-सच्ची विजयदशमी मनाएंगे।